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उपपा की पहल पर दो दिवसीय जनसंवाद शिविर शुरू, उत्तराखंड की अस्मिता बचाने के लिए संघर्षशील ताकतों से एकजुट होने का आह्वान

अल्मोड़ा। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी व सहयोगी संगठनों की पहल पर दो दिवसीय जनसंवाद शिविर शनिवार से शुरू हो गया है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि जिन सपनों के साथ इस पर्वतीय राज्य का निर्माण हुआ था वह सरकारों की कुनीतियों के कारण पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं। उत्तराखंड की अस्मिता आज पूरी तरह खतरे में है। राज्य की अवधारणा व परिकल्पना को साकार करने के लिए सभी संघर्षशील व उत्तराखंडी सोच की ताकतों को एकजुट होने की जरूरत है।

 

यहां नगर के धारानौला स्थित एक होटल सभागार में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत जनकवि गिरीश तिवाड़ी ‘गिर्दा’ के प्रसिद्ध जनगीत, ‘हम लड़ते रैया भुला हम लड़ते रूंला… को सामूहिक रूप से गाने के साथ हुई।

 

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा, सरकारों की विनाशकारी नीतियों के चलते आज पूरा उत्तराखंड आपदा के मुहाने पर खड़ा है। राज्य के कई जिलों के बाशिंदे इस समय आपदा की मार झेल रहे हैं। गांव के गांव तबाह हो चुके हैं। कई लोग अपनी जांन गंवा चुके हैं। राज्य में खेती किसानी चौपट हो चुकी है। सरकार की मिलीभगत के चलते वर्तमान में राज्य के संसाधनों पर बाहरी लोगों का कब्जा हो चुका है। पूरा राज्य पलायन, बेरोजगारी और महंगाई की मार झेल रहा है। वक्ताओं ने राज्य की इस दुर्दशा के लिए सीधे तौर पर पूर्ववर्ती सरकारों व मौजूदा सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

 

 

शिविर के संयोजक व उपपा अध्यक्ष पीसी तिवारी ने कहा कि दिल्ली से रिमोर्ट कंट्रोल से चलने वाली सरकारों ने राज्य के मेहनतकश मजूदरों, किसानों, नौजवानों को हाशिए पर रख दिया है। इन सभी को न्याय देने के लिए एक बड़े संघर्ष की जरूरत है। इस व्यवस्था में कैसे बदलाव लाया जा सकता है ऐसे तमाम सवालों को लेकर शिविर में विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में सामाजिक राजनीतिक तौर पर बड़े बदलाव के लिए सभी संघर्षशील ताकतों को आगे आकर वैचारिक लड़ाई लड़नी होगी। जिसके बाद ही उत्तराखंडी अस्मिता, अवधारणा और यहां के संसाधनों को बचाया जा सकता है।

 

संचालन उपपा के महासचिव नरेश नौड़ियाल ने किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार व लेखक चारू तिवारी, पर्यावरण, सामाजिक कार्यकर्ता व लोक प्रबंध विकास संस्था के संचालक ईश्वर जोशी, सेवानिवृत्त केंद्रीय कल्याण कर्मचारी समिति के सचिव चंद्रमणी भट्ट, प्रभात ध्यानी, आनंदी वर्मा समेत कई लोगों ने अपने विचार रखें।

 

यहां उपपा के केंद्रीय महासचिव एडवोकेट नारायण राम, गोपाल राम, पूरन सिंह, गोविंद सिंह सिजवाली, प्रकाश जोशी, हेमा, उछास की भावना पांडे, ममता जोशी, सोनी मेहता, किरन आर्या, पुष्पा थापा, अमीनूर्रहमान, नीरज पंत, जगदीश राम, कौस्तुभानंद भट्ट, हयात सिंह रावत, रमेश पांडे, पुष्कर बिष्ट, हेमलता तिवारी, वंदना कोहली, वैभव जोशी, दीपांशु पांडे, राकेश समेत कई लोग मौजूद रहे।

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