-कार्यशाला में वैज्ञानिक, नीति निर्माता एवं विषय विशेषज्ञ कर रहे प्रतिभाग
अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला जारी है। कृषि संरचनाओं और पर्यावरण प्रबंधन में प्लास्टिक इंजीनियरिंग विषय पर आयोजित हो रही कार्यशाला के दूसरे दिन शुक्रवार को दो सत्र हुए।
तकनीकी सत्र आईसीएआर नई दिल्ली के उप महानिदेशक (अभियान्त्रिकी) डॉ. एस.एन. झा की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मखदूम, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर, केन्द्रीय कटाई उपरान्त अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, अबोहर, शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विवि-कश्मीर, श्रीनगर, बिरसा कृषि विवि, रांची, केंद्रीय मीठाजल जलीय कृषि संस्थान, भुवनेश्वर, वीपीकेएएस अल्मोड़ा, केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, गंगटोक, पूर्वोत्तर पर्वतीय क्षेत्र के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का अनुसंधान परिसर, बारापानी, कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय रायचूर, पंजाब कृषि विवि, लुधियाना, राष्ट्रीय याक अनुसंधान केंद्र, दिरांग, बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विद्यापीठ, दपोली एवं जूनागढ़ कृषि विवि, जूनागढ़ के प्रतिनिधियों ने अपने केन्द्रों की उपलब्धियों पर प्रस्तुतिकरण दिया।
पूर्ण सत्र का आयोजन डॉ. एस.एन. झा की अध्यक्षता एवं डॉ. के नरसैया, सहायक महानिदेशक (प्रोसेस इंजीनियरिंग), आईसीएआर नई दिल्ली की सहअध्यक्षता में किया गया। दोनों अतिथियों द्वारा केन्द्रों द्वारा प्रस्तुत उपलब्धियों पर चिन्तन करते हुए कृषि में प्लास्टिक के उपयोग द्वारा अभियान्त्रिकी की सुदृढ़ता के लिए भविष्य की रणनीति बनायी गई।
कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों में स्थित चौहद सहयोगी केन्द्रों के करीब पचास से अधिक वैज्ञानिक, कृषि अभियंता, नीति निर्माता एवं प्रसार कार्यकर्ताओं के अतिरिक्त विषय विशेषज्ञ डॉ. राकेश शारदा, डॉ. टीबीएस राजपूत, डॉ. एस पटेल एवं ई. आनन्द जामब्रे मौजूद रहे।
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