अल्मोड़ा: भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) जिला ईकाई द्वारा कॉमरेड नागेन्द्र सकलानी और मोलू भरदारी के शहादत दिवस पर दोनों क्रांतिकारियों का स्मरण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। वक्ताओं ने आज के दौर में जनहित में पूंजीवाद, साम्राज्यवाद और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के विरुद्ध और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष का संकल्प लिया।
श्रृद्धांजलि सभा में बोलते हुए वक्ताओं ने कहा कि टिहरी रियासत में जनता पर सामंतशाही का दमन जोरों पर था। जिसके विरुद्ध युवा नागेन्द्र ने जनता को आंदोलन के लिए तैयार किया। दादा दौलतराम ने जगह-जगह जन सभाएं की। कड़ाकोट और डांगचौर क्षेत्र में नागेन्द्र सकलानी को गिरफ्तार कर टिहरी जेल में डाल दिया गया। और 3 जनवरी 1946 को रिहा किया गया।
वक्ताओं ने कहा, 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हो चुका था, लेकिन टिहरी रियासत अभी भी राज शाही के अधीन था। इस अन्याय के खिलाफ 10 जनवरी 1948 को प्रजा मंडल के युवा नेता कामरेड नागेंद्र सकलानी के नेतृत्व में त्रेपन सिंह नेगी, किसान नेता दादा दौलतराम आदि सैकड़ों लोगों ने कीर्ति नगर के सरकारी भवनों को घेर लिया। जिस कारण रियासत की फौज और प्रशासन आत्मसमर्पण को करना पड़ा। इस प्रकार कीर्ति नगर आज़ाद पंचायत की स्थापना की गई।
कहा कि 11 जनवरी 1948 के संघर्ष में नागेन्द्र सकलानी और मोलू भरदारी वीरगति को प्राप्त हुए। लंबे संघर्षों के बाद 1 जनवरी 1949 को कामरेड वीर चंद्र सिंह गढ़वाली और उनके साथियों द्वारा टिहरी रियासत का भारत में विलय कर लिया गया।
श्रृद्धांजलि सभा में सीपीआईएम जिला सचिव कॉमरेड राजेंद्र प्रसाद जोशी, यूसुफ तिवारी, सुनीता पाण्डे, योगेश कुमार टम्टा, प्रमोद तिवारी ने भाग लिया।
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