अल्मोड़ा। देवभूमि कहलाने वाले उत्तराखण्ड की सतह ऊपर से कितनी ही मानवीय और मुलायम दिखाई दे सच तो यह है कि यहाँ के समाज के सोचने के तरीके में बहुत कुछ नहीं बदला है। हम 21वीं सदी में रहते हैं। समानता अभी भी एक मिथक है और ग्रामीण परिवेश में सवर्णों और शिल्पकार कहे जाने वाले दलितों में भेदभाव अभी भी प्रचलित है।
अल्मोड़ा में जातीय भेदभाव का ऐसा ही एक शर्मनाक मामला सामने आया है। जिसमें गांव के ही कुछ सवर्ण जाति के लोगों पर अनुसूचित जाति के दूल्हे को बारात के दौरान घोड़े से उतारने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगे हैं। दूल्हे के पिता ने इस मामले की शिकायत अल्मोड़ा डीएम, एससी -एसटी आयोग, राज्यपाल से लेकर पीएम नरेंद्र मोदी तक की है।
जिले के सल्ट तहसील के ग्राम थला तड़ियाल( मौडोली) निवासी दर्शन लाल का कहना है कि उनके पुत्र विक्रम कुमार का विगत 2 मई को विवाह था। उनका आरोप है कि बारात प्रस्थान के वक्त लगभग साढ़े 4 बजे थला तड़ियाल गांव के मजबाखली तोक के सवर्ण जाति के कुछ महिलाओं और कुछ पुरुषों द्वारा दूल्हे को अनुसूचित जाति का होने के कारण घोड़े से जबरन उतारने और बारात रोके जाने की कोशिश की गई। यही नही उनका आरोप है कि उनके द्वारा जाति सूचक शब्दो का इस्तेमाल कर यह धमकी दी गयी कि अगर बारात नहीं रोकी गयी तो, सभी बारातियों को कफल्टा कांड की तरह जान से मार दिया जाएगा।
आरोप है कि बारात रोकने के वक्त वहाँ मौजूद अधिकांश महिलाओ द्वारा यह कहा गया कि अभी उनकी किस्मत अच्छी है, क्योंकि उनके अधिकांश पुरुष वर्ग अभी घर पर नही हैं, अन्यथा उन्हें जिंदा जला दिया जाता।
दर्शन लाल ने इस मामले में सल्ट एसडीएम, अल्मोड़ा डीएम, एससी-एसटी आयोग, उत्तराखंड राज्यपाल से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक शिकायती पत्र भेजकर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग की है।
इधर इस मामले में सल्ट तहसील के प्रभारी नायब तहसीलदार दीवान गिरी गोस्वामी का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में है। एसडीएम के निर्देश पर राजस्व उपनिरीक्षक सुभाष व कानूनगो चतर सिंह को जांच के लिए तुरंत गांव भेजा गया है। उन्होंने कहा कि आज वह खुद मौके पर जाकर जांच करेंगे। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उस आधार पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
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