अल्मोड़ाः विवेकानंद इंटर कॉलेज, रानीधारा में रविवार को ‘मातृ सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। सम्मेलन में अविभावकों के सम्मुख छात्रों का व्यवहारिक व शैक्षणिक पक्ष रखा गया। इस अवसर पर विभिन्न अतिथियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए माताओं को अपने पाल्यों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी।
प्रधानाचार्य मोहन सिंह रावल ने कहा शिशु की शिक्षा मां के गर्भ से ही प्रारम्भ हो जाती है। शिशु की पहली शिक्षक मां ही होती है। एक माँ हर पल अपने बच्चों का ध्यान रखती है। और बच्चों के मन में भी माँ के लिए सबसे खास जगह होती है।

मुख्य अतिथि प्रोफेसर इला साह ने कहा कि भारतीय संस्कृति में मां के प्रति लोगों में श्रद्धा रही है। माँ शब्द में सम्पूर्ण सृष्टि का बोध होता होता है।
अध्यक्ष लता बोरा ने कहा कि मां को धरती पर विधाता की प्रतिनिधि कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नही होगी। सच तो यह है कि मां विधाता से कहीं कम नही है।
मंच का संचालन करते हुए विद्या लटवाल ने कहा कि मां शब्द की कोई परिभाषा नही होती। यह शब्द अपने आप में परिपूर्ण है। ईश्वर ने मां के द्वारा ही सम्पूर्ण सृष्ठि की रचना की है। इस अवसर पर समस्त विद्यालय परिवार उपस्थित रहा।
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