अल्मोड़ा। पूर्व विस अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने लोकसभा व विधानसभा की तरह त्रिस्तरीय पंचायती संस्थाओं को संवैधानिक अधिकार दिए। लेकिन भाजपा सरकार पंचायती व्यवस्था को कमजोर करने पर तुली है। जिससे धीरे-धीरे इन संस्थाओं के अधिकारों पर संकट मडराने लगा है।
प्रेस को जारी एक बयान में पूर्व स्पीकर कुंजवाल ने कहा कि संवैधानिक दायरे में लाकर यह निश्चित किया गया था कि जिस तरह से केन्द्र व राज्य सरकार काम करती हैं, ठीक उसी प्रकार ग्राम सभा, क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत भी स्वतंत्र रूप से काम कर सकें। लेकिन भाजपा सरकार में ऐसा नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि इसका सबसे बड़ा जीता जागता उदाहरण अधिकांश क्षेत्र समितियों में पिछले पांच वर्ष में केवल एक बैठक का होना है।
कुंजवाल ने कहा कि सरकार रोजगार गारंटी योजना के नियमों को ताक में रखकर इस तरह की योजनाएं बना रही है जिसमें भयंकर भ्रष्टाचार होने के उदाहरण है। वृक्षारोपण योजना में रोजगार गारंटी योजना का बजट खर्च कर दिया गया है। अब उसमें भ्रष्टाचार की बात सामने आ रही हैं। उन्होंने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
कुंजवाल ने कहा कि जब क्षेत्र पंचायत की बैठक ही नहीं हुई तो किसके अनुमोदन से क्षेत्र पंचायत बजट बांटा व खर्च किया गया है, यह बात समझ से परे है। जबकि वार्षिक योजनाएं भी पंचायतों के सदनों से स्वीकृत करके खर्च करने की व्यवस्था है। जिसका पालन भी पारदर्शिता के आधार पर नहीं हुआ है।
पूर्व विस अध्यक्ष कुंजवाल ने नगर निगम के बाद अब ग्राम व क्षेत्र पंचायतों को भी प्रशासक के हवाले करने पर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि प्रशासक लगाना पंचायतों को कमजोर करना व अलोकतांत्रिक है। भाजपा को निकायों, पंचायतों में हार का डर सता रहा है इसलिए सरकार लगातार चुनाव टाल रही है।
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