अल्मोड़ा। सरकार भले ही जीरो टॉलरेंस पर जोर दे रही है, लेकिन सरकारी मशीनरी को इसकी परवाह नहीं है। पर्याप्त बजट होने के बावजूद कार्यदाई संस्था मंडी परिषद निर्धारित समय बीत जाने के दो साल बाद भी दन्या महाविद्यालय भवन तैयार नहीं कर सकी है। जीआईसी के जर्जर आवासीय भवन में अध्ययनरत 750 विद्यार्थियों का धैर्य भी अब टूट गया है। उन्होंने डीएम को ज्ञापन भेजकर लेट लतीफी के विरोध में 15 दिन बाद आंदोलन चलाने का ऐलान किया है।
सरकार ने 12 फरवरी 2021 को जिले के दन्या कस्बे में डिग्री कॉलेज स्वीकृत किया। कॉलेज भवन निर्माण लिए कार्यदाई संस्था मंडी परिषद को पांच करोड़ रुपए मंजूर किए। मंडी परिषद ने निविदा के जरिए काम शुरू किया। निविदा शर्तों के मुताबिक मई 2023 में काम पूरा हो जाना था। हैरानी इस बात की है तय सीमा के बाद भी दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी काम पूरा नहीं हुआ है।
स्थापना के समय से ही डिग्री कॉलेज जीआईसी के जर्जर आवासीय भवन में संचालित है। वर्तमान में यहां विद्यार्थियों की संख्या करीब 750 पहुंच गई है। सीलन भरी दीवार, टूटा प्लास्टर, छोटे-छोटे कमरों में विद्यार्थियों के बैठने को जगह ही नहीं है तो किस प्रकार से पठन-पाठन चल रहा होगा यह समझा जा सकता है। भवन निर्माण कार्य की कछुआ चाल, कार्यदाई संस्था के उदासीनता और सरकार की बेरुखी से अभिभावकों और विद्यार्थियों का धैर्य टूटने लगा है।
विद्यार्थियों ने डीएम को ज्ञापन भेज कर भवन निर्माण में हो रही देरी पर नाराजी जताई है। उन्होंने 15 दिन में व्यवस्था में सुधार नहीं होने पर राष्ट्रीय राजमार्ग (309 बी) में विरोध स्वरूप कक्षाएं संचालन करने की चेतावनी दी है। अब देखना है प्रशासन और सरकार का जीरो टॉलरेंस विद्यार्थियों की समस्या को लेकर होता है या शत प्रतिशत टोलरेंस कार्यदाई संस्था और ठेकेदार के हित में होगा।
भवन निर्माण का कार्य काफी देरी से चल रहा है। इसके लिए ठेकेदार नोटिस भी दिए गए हैं और नियमानुसार उस पर जुर्माना लगाने की भी कारवाई विभाग करेगा। वर्तमान में काम तेजी से चल रहा है। नवंबर महीने तक काम पूरा हो जाने की उम्मीद है।
-मोहसिन खान, सहायक अभियंता मंडी परिषद।
कई कारणों से काम में देरी हुई है। इसका स्पष्टीकरण विभाग को दिया गया है। वर्तमान में प्लास्टर काम पूरा हो गया है। पुट्टी और रंगरोगन का काम लगातार हो रही बारिश से रुका है। अगले तीन महीनों में काम पूरा कर भवन मंडी परिषद को स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
-रघुवीर सिंह बिष्ट, ठेकेदार।
स्थापना के समय से ही डिग्री कॉलेज पुराने भवन में चल रहा है। इस भवन में बैठने को पर्याप्त कमरे, पेयजल, बिजली शौचालय की व्यवस्था भी नहीं है। संसाधन विहीन भवन में किस प्रकार से पढ़ाई चल रही होगी इस बारे में संवेदनशीलता से सोच कर प्रभावी कदम उठाया जाना चाहिए।
-भावेश जोशी, छात्र।
सरकार बालिका शिक्षा पर काफी जोर दे रही है। दन्या डिग्री कॉलेज में स्थापना के चार साल से अधिक समय बाद भी संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। कई बार शिकायत करने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। अब विद्यार्थियों के पास आंदोलन ही एकमात्र रास्ता बचा है। समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो फिर लंबा आंदोलन चलाना मजबूरी है।
-अनुराधा गैड़ा, छात्रा।
महाविद्यालय में वर्तमान में करीब 750 विद्यार्थी अध्यनरत हैं। विद्यार्थियों की संख्या सैकड़ों में है पर सुविधा नाम मात्र की भी नहीं है। तीन साल से भवन निर्माण कछुआ गति से हो रहा है और यही हाल रहा तो लंबे समय बाद भी काम पूरा होने की उम्मीद नहीं है। धैर्य की सीमा पार हो गई है, अब आंदोलन ही एकमात्र विकल्प बचा है।
-खजान जोशी, छात्र।
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