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वन पंचायतों के सशक्तिकरण के लिए वन पंचायत अधिनियम बनाने की उठाई मांग, शासन-प्रशासन पर लगाया उपेक्षा का आरोप

अल्मोड़ा। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के अवसर पर वन पंचायत संगठन, ताकुला द्वारा ईनाकोट में बैठक की गई। बैठक में वन पंचायतों की समस्याओं पर चर्चा की गई। साथ ही वन पंचायतों के सशक्तिकरण के लिए वन पंचायत अधिनियम बनाने की मांग पुरजोर ढंग से उठाई गई। वक्ताओं ने वन पंचायतों की बदहाली के लिए शासन प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाया।

इस अवसर पर वन पंचायतों को वन विभाग के अनावश्यक हस्तक्षेप से मुक्त कर उनकी स्वायत्तता बहाल करने, वन पंचायत के चुनाव समस्त प्रदेश में एक साथ गुप्त मतदान द्वारा कराए जाने, जिन वन पंचायतों का क्षेत्रफल कम है उनमें आरक्षित वन क्षेत्र मिलाकर उनका विस्तार करने, वन पंचायतों को नियमित बजट उपलब्ध कराने, वन पंचायत के भीतर किये जाने वाले वन एवं जल संरक्षण सहित समस्त विकास कार्य वन पंचायत के माध्यम से कराए जाने, वन पंचायत प्रतिनिधियों को सम्मानजनक मानदेय देने तथा उनका बीमा कराए जाने, लीसा रॉयल्टी का पैसा तत्काल वन पंचायतों के खाते में डालने, माइक्रो प्लान की जटिल प्रक्रियाओं को सरल कर वन पंचायत द्वारा पारित प्रस्ताव एवं सामान्य तरीके से बनाये गई कार्य योजना को माइक्रोप्लान मान स्वीकृति दिए जाने की मांग की गई।

 

वन पंचायत नियमावली में 2024 में किये गये संशोधन के बाद राज्य स्तरीय परामर्श दात्री समिति में सरपंचों के प्रतिनिधित्व को समाप्त किए जाने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की गई। वन पंचायत नियमावली में किये जाने वाले किसी भी संशोधन से पूर्व वन पंचायत प्रतिनिधियों एवं वन मुद्दों से जुड़े संगठनों, व्यक्तियों से सुझाव लिए जाने की मांग की गई। तय किया गया कि शीघ्र ही वन पंचायत की समस्याओं को लेकर एक शिष्टमंडल प्रभागीय वनाधिकारी एवं जिला प्रशासन से मुलाकात करेगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता अध्यक्ष सुंदर सिंह पिलख्वाल एवं संचालन सचिव पूरन सिंह बिष्ट ने किया। बैठक को वन पंचायत संगठन के संरक्षक ईश्वर जोशी, कोषाध्यक्ष बहादुर सिंह मेहता, दिनेश पिलख्वाल, महेंद्र सिंह बिष्ट, जगदीश सिंह बिस्ट, डूंगर सिंह भाकुनी, आनंदी देवी, देवकी देवी, हेमा देवी, प्रेमा देवी, दीप्ति भोजक, अशोक भोज, चंपा मेहता आदि ने संबोधित किया।

 

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