अल्मोड़ा। सोमवार को विश्व किशोर मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया गया। अकेलापन, प्रतिस्पर्धा और परामर्श सेवाओं की कमी के कारण युवा तेजी से डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। स्थानीय बेस अस्पताल में रोजाना करीब 40 युवा क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट के पास काउंसलिंग को आ रहे हैं जिसमें करीब सात से नौ किशोर होते हैं।
मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित बेस अस्पताल में तैनात क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट प्रियंका बोनाल ने बताया कि किशोर अवस्था में युवा शैक्षणिक दबाव, सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग पारिवारिक अपेक्षाओं और शारीरिक परिवर्तनों के कारण तेजी से मानसिक तनाव का शिकार हो रहे हैं। इस तनाव से उनमें डिप्रेशन, चिंता थकान और आत्महत्या के विचार आम हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि युवा वर्ग सबसे अधिक मानसिक तनाव की चपेट में आ रहा हैं। खासकर 17 से 25 साल के युवा मानसिक तनाव से अधिक जूझ रहे हैं। कई बार अभिभावक बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों से करते हैं। इससे भी युवाओं तनाव में रहते हैं।
उन्होंने बताया कि 40 से 45 मरीज रोजाना उनके पास काउंसलिंग को पहुंच रहे हैं। तनाव के चलते युवाओं का झुकाव नशे की ओर हो जाता है। नशे की लत लगने पर वह धीरे-धीरे इसके आदि हो जाते हैं। युवाओं की मानसिक अस्वस्थता देश के भविष्य की शैक्षिक, आर्थिक और सामाजिक प्रगति के लिए चुनौती बनती जा रही है।
उन्होंने बताया कि किशोर और 16 से 25 साल के युवाओं में निर्णय लेने की क्षमता नहीं होती है। वह खुद को इमोनशली कंट्रोल नहीं कर पाते हैं। उन्हें भावानात्मक सपोर्ट की जरूरत होती है। अभिभावकों को उनकी भावनाओं को समझना चाहिए। कई बार अभिभावक भी उनकी बातों को अनसुनी कर देते हैं। ऐसे में वह खुद को अकेला महसूस करते हैं। अभिभावकों को उनके साथ क्वालिटी टाइम बिताना चाहिए।
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