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अल्मोड़ा लिट फेस्ट-2025: न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित बोलें- संविधान विश्व का सबसे बड़ा जीवंत दस्तावेज

अल्मोड़ा। अल्मोड़ा लिट फेस्ट के तीसरे दिन कई सत्र आयोजित हुए। कार्यक्रम की शुरुआत पाल कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट के निदेशक द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुई। महोत्सव में भारतीय संविधान के 75 वर्ष पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में नैनीताल हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित ने शिरकत की। इस सत्र की अध्यक्षता संयोजक एड. विनायक पंत ने की।

 

सत्र के दौरान न्यायमूर्ति पुरोहित ने अपने विधिक अनुभव साझा करते हुए संविधान को विश्व का सबसे बड़ा जीवंत दस्तावेज बताया। उन्होंने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की मजबूती और सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका को मौलिक अधिकारों के रक्षकके रूप में रेखांकित किया। विकास में न्यायपालिका को बाधा बताने वाली टिप्पणियों को उन्होंने अनुचित बताते हुए कहा कि स्वतंत्र न्यायपालिका भारत के संघीय ढांचे की आधारशिला है।

 

उन्होंने कोलेजियम प्रणाली में सुधार की आवश्यकता मानी। लेकिन उसकी स्वतंत्रता बनाए रखने पर बल दिया। पर्यावरणीय चुनौतियों पर उन्होंने कहा कि नए कानूनों से अधिक मौजूदा कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत है। उत्तराखंड को पांचवीं अनुसूची का दर्जा देने की मांग पर न्यायमूर्ति पुरोहित ने संयम और राष्ट्र प्रथम की भावना अपनाने की सलाह दी। यूकेएसएसएससी परीक्षा प्रकरण पर बोलते हुए उन्होंने नैतिक शिक्षा और मूल्य आधारित शासन पर जोर दिया।

 

 

इससे पहले का सत्र एवरीडे माइथोलॉजी विषय पर केंद्रित रहा। इस विचारोत्तेजक सत्र में प्रख्यात लेखिका ईरा टाक और विचारक सुनीता पंत बंसल ने अपने सारगर्भित विचार साझा किए। देखने में छोटे लगे घाव करे गंभीर ने व्यंग्य साहित्य की गहराइयों पर गंभीर विमर्श प्रस्तुत किया। इस सत्र का संचालन डॉ. दीपा गुप्ता ने किया। जिसमें उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी के साथ प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. लालित्य ललित और प्रेम जन्मेजय ने भाग लिया।

 

 

हिन्दी पठनीयता में महा विस्फोट सत्र हिंदी प्रकाशन जगत की वर्तमान दिशा और भविष्य की संभावनाओं पर केंद्रित रहा। इस सत्र में हिंद युग्म के संस्थापक और प्रसिद्ध प्रकाशक शैलेश भारतवासी ने अपने विचार साझा किए। भारतवासी ने हाल ही में चर्चाओं में रहे उस प्रसंग पर खुलकर बात की, जिसमें वरिष्ठ लेखक विनोद कुमार शुक्ल को तीस लाख की कथित रॉयल्टी मिलने की खबर सामने आई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह राशि रॉयल्टी नहीं बल्कि पाठकों की ओर से मिला रिपोर्ट कार्ड है, जो लेखक के प्रति उनके प्रेम, सम्मान और विश्वास का प्रतीक है।

 

कार्यक्रम में आयोजक डॉ. वसुधा पंत, प्रोफेसर एसए हामिद, प्रोफेसर दिवा भट्ट, मनमोहन चौधरी, नीरज पांगती समेत कई लोग मौजूद रहे।

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