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सुमित्रानंदन पंत की 126 वीं जयंती: पैतृक आवास पर याद किए गए पंत, डॉ दिवा भट्ट को सुमित्रानंदन पंत पुरस्कार से नवाजा

अल्मोड़ा: छायावाद के महान स्तंभ और प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत की 126 वीं जयंती के अवसर पर बुधवार को उनके पैतृक गांव स्यूनराकोट में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पंत के पैतृक आवास के प्रांगण में हुए इस समारोह में उनके समृद्ध रचना संसार और मानवीय संवेदनाओं पर गंभीर चर्चा की गई। इस खास मौके पर पंत की गोद ली हुई बेटी सुमिता पंत मुख्य अतिथि के रूप में विशेष तौर पर मौजूद रहीं।

 

सर्वप्रथम अतिथियों द्वारा सुमित्रानंदन पंत के चित्र पर पुष्प अर्पित कर माल्यार्पण किया गया। राजकीय इण्टर कॉलेज कमलेश्वर की छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना और स्वागत गीत गाकर सभी का स्वागत किया।

 

इस मौके पर हिंदी/कुमाउनी की लब्ध प्रतिष्ठ विद्वान डॉ दिवा भट्ट को स्व लक्ष्मी पंत पत्नी स्व हंसा दत्त पंत की स्मृति में (उनके पुत्र प्रो अरुण पंत की ओर से) सुमित्रानंदन पंत पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वहीं डा धाराबल्लभ पांडे की पुस्तक सुमित्रानंदन पंत एक अध्ययन का विमोचन किया गया।

 

 

सुमित्रानंदन पंत स्मारक समिति स्यूनराकोट के अध्यक्ष इंद्र सिंह बिष्ट की अध्यक्षता में हुए आयोजन में मुख्य वक्ता प्रो देव सिंह पोखरिया ने विस्तार से पंत के रचना संसार के रखा। कहा कि पंत ने 42 ग्रंथ लिखे हैं। कक्षा 4 में पढ़ने के दौरान उन्होंने काव्य रचना शुरू कर दी थी। उनकी रचनाओं में प्रकृति के साथ ही मानवीय संवेदनाएं समाहित हैं। पंत ने भारतीय समाज की विडंबना के साथ ही भविष्य के लिए मार्ग दर्शन भी किया है। उनकी रचनाओं में विश्व बंधुत्व का भारतीय दर्शन समाहित है। पंत छायावाद तक सीमित नहीं रहें हैं उन्होंने प्रगतिवाद व विश्व बंधुत्व वाद तक अपनी रचनाओं को पहुंचाया है। केवल कविता नहीं उन्होंने साहित्य की गद्य व नाटक आदि विधाओं में अपनी प्रतिभा का प्रतिपाद किया है। प्रो पोखरिया ने कहा कि सही मायने में उनकी रचनाओं का समीक्षा किए जाने की जरूरत है।

 

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पंत की गोद ली बेटी सुमिता पंत विशेष तौर पर मौजूद रहीं। उन्होंने अपने और सुमित्रानंदन पंत के बारे में कई किस्से सुनाए और एक कविता जो उनके ऊपर बनाई गई ‘मेरी प्यारी बेटी सुमिता’ का पाठ किया।

 

संयोजन व संचालन कवि साहित्यकार नीरज पंत ने किया। इस मौके पर सैफाली पांडे, भावना जोशी, विपिन जोशी, कोमल, मोहन लाल टम्टा, गीता पांडे, बीना चतुर्वेदी, सोनू उप्रेती, गायक लता पांडे आदि ने काव्य पाठ किया।

 

 

ग्राम प्रधान हरीश राम ने ‘बुरांश’ पर कुमाउनी में गीत प्रस्तुत किया। राइंका चौरा हवालबाग अल्मोड़ा की छात्रा ममता बिष्ट ने पंत की चार कविताओं का स्वस्वर कविता पाठ कर मुख्य अतिथि के द्वारा पुरस्कार प्राप्त किया। शमशेर ने मां नंदा देवी को समर्पित एक गीत प्रस्तुत किया।

पंत पर लिखे निबंध पर अव्वल रही सलोनी पिलख्वाल, अनुष्का मेहता, अर्चिता नगरकोटी, निशा पिलख्वाल को नीलांबर जोशी स्मृति न्यास की ओर से नकद पुरस्कार प्रदान किए गए। कार्यक्रम के अंत में पूर्व सीएम बी.सी खंडूरी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि दी गई।

 

इस कार्यक्रम में आदरणीय उमेश चंद्र पांडेय , कंचन तिवारी, नरेंद्र पाल सिंह, दिनेश पांडेय , अशोक पंत, सोनू उप्रेती, पूनम पंत, हिमांशु पंत, चेतन पंत, डॉ विजया ढ़ोंडियाल, भगवती गुसाई, डॉ हयात सिंह रावत, भूषण पांडेय , ध्रुव टम्टा, डॉ हेमंत कुमार पांडे, पीसी तिवारी, प्रो एसए हामिद, लता पांडे, शीला पंत, गिरिजा पंत, बिपिन चंद्र पंत, चित्रा पंत, विपुल जोशी, त्रिभुवन गिरी महाराज, बलवंत सिंह बिष्ट, डॉ अनिल जोशी, जीवन चंद्र तिवारी, शेफाली पांडे आदि मौजूद रहे।

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