अल्मोड़ा। सरकारी अस्पतालों में बिना ठोस वजह के मरीजों को रेफर करने और अनावश्यक रूप से बाहर की दवाईयां लिखने का डीएम ने संज्ञान लिया है। डीएम ने मामले में सीएमओ और सभी चिकित्साधिकारियों को मामले में निर्देश जारी किए है। डीएम ने कहा मरीजों को जबरन बाहर की दवाई लेने के लिए बाध्य किया तो संबंधितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
डीएम ने कहा कि कुछ तथ्य संज्ञान में आए हैं कि कुछ चिकित्सकों द्वारा जानबूझकर मरीजों के लिए ऐसी दवाइयां लिखी जाती हैं, जो चिकित्सालय में उपलब्ध नहीं होती है और जेनेरिक दवाइयां भी चिकित्सकों द्वारा नहीं लिखी जाती है। जिस कारण मरीजों और उनके तीमारदारों को मेडिकल स्टोर से वह दवाइयां खरीदने के लिए विवश होना पड़ता है और उन पर आर्थिक बोझ पड़ता है।
डीएम ने निर्देश जारी कर कहा कि यदि बाहर की दवाइयां लिखनी अतिआवश्यक है तो उन दवाइयों का रिकॉर्ड भी चिकित्सकों को रखना होगा। यह रिकॉर्ड न्यूनतम एक साल तक अस्पताल में संरक्षित रखा जाएगा जिससे मरीज के शिकायत किए जाने पर उसकी जांच की जा सके कि किस वजह से बाहर की दवाई लिखी गई है।
सरकारी अस्पतालों में बढ़ते रेफरल मामलों को भी डीएम ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि कई बार साधारण मरीजों को भी अनावश्यक रेफर किया जाता है, जिससे कि मरीजों को उपचार मिलने में विलम्ब होता है, जो कतई सही नहीं है। रेफरल मरीज के विवरण के सम्बन्ध में चिकित्सालयों में एक पंजिका तैयार की जायें। जिसमें संबंधित मरीज का पूरा विवरण हो। डीएम ने कहा यदि भविष्य में इस तरह की शिकायतें फिर प्राप्त हुई तो संबंधितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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