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ग्रामीण महिलाओं ने बिखेरे प्रकृति के रंग, हर्बल रंगों से दी ‘सुरक्षित होली’ की सीख

 

अल्मोड़ा: ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना REAP) के तहत विकासखंड भैसियाछाना में महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण की एक नई तस्वीर देखने को मिली है। ब्लॉक के अंगीकृत क्लस्टरों से जुड़ी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने आगामी होली पर्व के दृष्टिगत प्राकृतिक व हर्बल रंगों का निर्माण कर अपनी उद्यमिता का लोहा मनवाया है।

 

महिलाओं ने बाजार में मिलने वाले हानिकारक रासायनिक रंगों के विकल्प के रूप में रसोई और प्रकृति के खजाने का उपयोग किया। इन रंगों को तैयार करने में पालक, धनिया, चुकंदर, गाजर तथा विभिन्न स्थानीय फूलों का प्रयोग किया गया है। महिलाओं का कहना है कि ये रंग न केवल त्वचा के लिए सुरक्षित हैं, बल्कि पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं पहुँचाते।

 

 

विकासखंड स्तर पर आयोजित कार्यक्रम के बाद, इस पहल को व्यापक स्तर पर पहुँचाने के लिए विकास भवन में दो दिवसीय प्रदर्शनी व स्टॉल लगाया गया। इस स्टॉल का मुख्य उद्देश्य आम जनता को रासायनिक रंगों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना था।

 

इस दो दिवसीय आयोजन के दौरान लोगों ने प्राकृतिक रंगों के प्रति भारी उत्साह दिखाया। महिलाओं ने न केवल ‘प्राकृतिक रंग– सुरक्षित होली’ का प्रभावी संदेश जन-जन तक पहुँचाया, बल्कि इस अल्प अवधि में 6,000 की आय भी अर्जित की।

 

 

यह पहल स्थानीय संसाधनों पर आधारित लघु उद्योगों को बढ़ावा देने और ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है।

 

​यह प्रयास दर्शाता है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही मार्गदर्शन और मंच मिले, तो वे अपनी पारंपरिक कुशलता से न केवल आर्थिकी सुधार सकती हैं, बल्कि समाज को स्वास्थ्य के प्रति सजग भी कर सकती हैं।

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