चमोली: उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में कथित दान-चढ़ावा चोरी के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। शुरुआती जांच में आरोप पहली नजर में सही पाए जाने के बाद आरोपी कर्मचारी प्रमोद नौटियाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई है। वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूरे मामले की हाई लेवल जांच के आदेश देते हुए 15 दिन में रिपोर्ट मांगी है।
बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष कार्यालय में तैनात व्यक्तिगत सहायक प्रमोद नौटियाल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। विभागीय जांच और निलंबन की कार्रवाई के बाद अब उनके खिलाफ पुलिस ने भी मुकदमा दर्ज कर लिया है।
बीकेटीसी के मंदिर अधिकारी युद्धवीर पुष्पवान की लिखित तहरीर पर थाना बदरीनाथ में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 306 और 316(5) के तहत FIR दर्ज की गई है।
तहरीर के मुताबिक, 2 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया के माध्यम से बदरीनाथ मंदिर में हुई कथित वित्तीय अनियमितता की सूचना मिलने के बाद मंदिर समिति ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। प्रारंभिक जांच में संबंधित कार्मिक प्रमोद नौटियाल द्वारा प्रथम दृष्टया मंदिर धनराशि को सुबह करीब 9 बजे से 9:30 बजे के बीच कथित रूप से अनधिकृत तरीके से धनराशि उठाए जाने की पुष्टि होने का उल्लेख किया गया है।
इसके बाद 7 जुलाई को बीकेटीसी ने प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। समिति ने माना था कि उन्हें पद पर बनाए रखने से निष्पक्ष जांच प्रभावित होने की आशंका है। अब बीकेटीसी की ओर से पुलिस में तहरीर दिए जाने के बाद मामला विभागीय जांच से आगे बढ़कर आपराधिक जांच के दायरे में पहुंच गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बदरीनाथ मंदिर में वित्तीय अनियमितता के आरोपों का सख्त संज्ञान लिया है। कथित अनियमितताओं की शिकायतों एवं प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर शासन ने मामले की गहन जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है।
समिति के अध्यक्ष आयुक्त गढ़वाल मंडल होंगे। समिति में प्रबंध निदेशक, NHM संदीप तिवारी तथा कार्यालय महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के निदेशक (वित्त) जगत सिंह चौहान सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं।
सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ब्याल द्वारा जारी आदेश के अनुसार समिति मंदिर में प्राप्त होने वाले दान-चढ़ावे से संबंधित कथित अनियमितताओं की विस्तृत जांच करेगी तथा 15 दिनों के भीतर अपनी जांच आख्या एवं संस्तुतियां शासन को प्रस्तुत करेगी।
जांच के दौरान आवश्यकता पड़ने पर समिति किसी भी अधिकारी, विशेषज्ञ अथवा अन्य संबंधित व्यक्ति का सहयोग एवं परामर्श प्राप्त कर सकेगी। साथ ही समिति दान-चढ़ावे के प्रबंधन तंत्र को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी एवं प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक सुधारात्मक उपायों एवं सुझावों से भी शासन को अवगत कराएगी।
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