अल्मोड़ा: देवभूमि उत्तराखंड में मंदिर सदियों से आस्था के केंद्र रहे हैं। लेकिन जिले के दूरस्थ विकासखंड सल्ट स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां मानिला देवी मंदिर इन दिनों अपनी एक अनोखी पहल को लेकर चर्चा में है। मंदिर समिति द्वारा क्षेत्र के जरूरतमंद, आर्थिक रूप से पिछड़े युवाओं को निशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही युवाओं को पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल देने के उद्देश्य से मंदिर परिसर में लाइब्रेरी भी स्थापित की गई है।
जिला मुख्यालय से करीब 140 किमी दूर इस मंदिर परिसर में साल 2025 से जरूरतमंद युवाओं को निशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए मंदिर समिति की ओर से बाकायदा एक प्रशिक्षक की व्यवस्था की गई है। वर्तमान में आसपास के क्षेत्र के 15 युवा निशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण ले रहे हैं। इससे पहले 20 बच्चों का एक बैच प्रशिक्षण प्राप्त कर चुका है।
आज के दौर में कंप्यूटर का ज्ञान शिक्षा से लेकर रोजगार तक लगभग हर क्षेत्र में जरूरी हो गया है। ऐसे में पहाड़ के दूरस्थ इलाकों के युवाओं के लिए कंप्यूटर प्रशिक्षण हासिल करना कई बार आर्थिक और भौगोलिक कारणों से चुनौती बन जाता है। युवाओं की इसी जरूरत को देखते हुए मंदिर समिति ने निशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण की व्यवस्था शुरू की।
लाइब्रेरी युवाओं के सपनों को दे रही नई दिशा
अल्मोड़ा: मंदिर समिति की यह पहल सिर्फ कंप्यूटर प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है। युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर माहौल मिले, इसके लिए मंदिर परिसर में लाइब्रेरी भी स्थापित की गई है। यहां युवा किताबों के बीच अपने सपनों को नई दिशा दे रहे हैं और सरकारी नौकरी समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। समिति ने लाइब्रेरी के उपयोग को लेकर कुछ नियम भी बनाए हैं। निशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं के लिए लाइब्रेरी में एक घंटे पढ़ाई करना अनिवार्य किया गया है। इसका उद्देश्य किताबों से दूर होते जा रहे आज के युवाओं में पढ़ने-लिखने की संस्कृति विकसित करना है। लाइब्रेरी में धार्मिक पुस्तकों के साथ यूपीएससी, सीपीएमटी समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से संबंधित किताबें भी उपलब्ध हैं। इससे युवाओं को एक ही स्थान पर कंप्यूटर प्रशिक्षण के साथ पढ़ाई के लिए भी बेहतर सुविधा मिल रही है।

शिक्षा के क्षेत्र में आज भी हमारा समाज काफी पिछड़ा हुआ है। खासकर सल्ट जैसे दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को तकनीकी व उच्च शिक्षा के अवसर नहीं मिल पाते हैं। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के चलते कई लोग अपने बच्चों को कौशल विकास से संबंधित कोर्स और उच्च शिक्षा के लिए जिला मुख्यालय या महानगरों में नहीं भेज पाते हैं। सेवानिवृत्त होने के बाद मन में यह टीस थी कि ऐसे बच्चों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में कुछ किया जाए। जिसके बाद मंदिर समिति द्वारा इस व्यवस्था को शुरू करने का निर्णय लिया गया। ताकि दूरस्थ क्षेत्रों में अन्य लोग भी इससे प्रेरणा लें और निर्धन बच्चों को उसका लाभ मिले।
-नंदन सिंह मनराल, अध्यक्ष, मां मानिला मंदिर प्रबंधन समिति।
धार्मिक स्थलों को केवल पूजा-अर्चना तक सीमित न रखकर समाज की जरूरतों से जोड़ने की यह पहल सकारात्मक संदेश दे रही है। मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालु और पर्यटक भी समिति के इस प्रयास की सराहना कर रहे हैं।
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