अल्मोड़ा। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological Survey of India) के विशेषज्ञों की एक टीम ने क्वारब में लैंडस्लाइड जोन का व्यापक निरीक्षण किया। सर्वेक्षण के आधार पर टीम दो सप्ताह में रिपोर्ट तैयार जिलाधिकारी कार्यालय को सौंपेगी।
बृहस्पतिवार की सुबह करीब 9 बजे जीएसआई की दो सदस्यीय टीम एनएच के आला अधिकारियों के साथ प्रभावित क्षेत्र पहुंची। इस दौरान टीम ने पहले सड़क की ओर से निरीक्षण किया। जिसके बाद पहाड़ी पर चढ़कर गहन परीक्षण किया। टीम क्षेत्र की समझ रखने वाले कुछ स्थानीय लोगों को भी अपने साथ ले गई। टीम ने करीब पांच घंटे तक प्रभावित पहाड़ी का हर एंगल से सर्वेक्षण किया। और क्षेत्र की वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन कर व संभावित जोखिम का आकलन किया गया।
राष्ट्रीय राजमार्ग रानीखेत खंड के अधिशासी अभियंता महेंद्र कुमार ने कहा कि टीम ने प्रभावित क्षेत्र का सर्वेक्षण कर डेटा एकत्रित किया। अध्ययन के बाद जीएसआई अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। करीब 15 दिन में यह रिपोर्ट जीएसआई की ओर से जिलाधिकारी कार्यालय को सौंपी जाएगी। उन्होंने कहा कि डेंजर जोन के पास हाई पॉवर लाईट की व्यवस्था कर दी गई है। समस्या के समाधान के लिए प्रयास जारी है।
गौरतलब है कि इससे पहले टीएचडीसी के भूवैज्ञानिकों की टीम दो बार लैंडस्लाइड जोन का निरीक्षण कर चुकी है। अगले सप्ताह तक टीएचडीसी अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंप सकती है। प्रभावित पहाड़ी के ट्रीटमेंट के लिए टीएचडीसी द्वारा ही डीपीआर तैयार की जानी है। जिसकी कार्यवाही पिछले सप्ताह से शुरू हो चुकी है।
निरीक्षण के दौरान जीएसआई की टीम के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग रानीखेत खंड के अधिशासी अभियंता महेंद्र कुमार, एई गिरीश पांडे, जेई जगदीश पपनै आदि मौजूद रहे।
नेशनल हाईवे पर दरकती पहाड़ी बनी संकट
अल्मोड़ा। अल्मोड़ा-हल्द्वानी राष्ट्रीय राजमार्ग को पहाड़ की लाइफलाईन कहा जाता है। हर रोज अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत व पिथौरागढ़ के लिए हजारों वाहन इसी नेशनल हाईवे से होकर अपने गंतव्यों तक पहुंचते है। अल्मोड़ा व नैनीताल जिले की सीमा को जोड़ने वाले क्वारब पुल के पास की पहाड़ी पिछले दो माह से राहगीरों के लिए मुसीबत बनीं है। दो माह से यह पहाड़ी धीरे धीरे दरक रही है। करीब 200 मीटर तक का हिस्सा प्रभावित हुआ है। पहाड़ी में बड़ी बड़ी दरारें आ चुकी है। और मलबा व पत्थर रूक रूक कर सड़क पर गिर रहे है। जिससे सड़क भी काफी संकरी हो चुकी है। यात्रियों को मजबूरन जान जोखिम में डालकर इस रूट से यात्रा करने को विवश होना पड़ रहा है।
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