अल्मोड़ा। सामाजिक कार्यकर्ता विनय किरौला ने कहा कि गांवों को सामाजिक-आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के लिए धर्मनिरपेक्ष युवा मंच लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि गांवों में प्राकृतिक व मानव संसाधनों की कोई कमी है। अगर सरकार ग्रामीण अंचलों में मूलभूत जरूरतों पर काम करे तो गांवों में रोजगार व स्वरोजगार के कई अवसर प्राप्त होंगे, इससे लगातार बढ़ रहे पलायन में पर रोक लग सकेगी।
प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में किरौला ने कहा कि मंच द्वारा फिर से गांव चलो अभियान 2.0 की शुरूआत की जाएगी। अभियान के तहत हर सप्ताह शनिवार व रविवार को मंच ग्रामीण अंचलों में जाकर लोगों की समस्याओं से रूबरू होगा।। उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य गांव-गांव में जाकर ग्रामीणों के साथ बैठक कर ग्रामीणों की आवाज को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने और गांवों को बुनियादी व्यवस्थाओं से लैस करना है।
किरौला ने कहा कि गांव आज भी बुनियादी जरूरतों सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, जंगली जानवरों के आंतक जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। सरकारों की उदासीनता से आज भी गांवों में मूलभूत अधिकारों से वंचित है। मंच द्वारा पूर्व में गांव चलो अभियान के तहत दो सौ से अधिक गांवों का भ्रमण किया गया। ग्रामीणों को साथ लेकर आंदोलनों, धरने आदि के माध्यम से उन्हें समस्याओं से बाहर निकालने के प्रयास किए गए। इसके बाद काफी ग्रामीण काफी हद तक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हुए हैं और उनमें एक नई चेतना विकसित हुई है।
प्रेस वार्ता में सुजीत टम्टा, जीवन सिंह बिष्ट, रोहित मेहता, निरंजन पांडे, विजय खम्पा आदि मौजूद रहे।
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