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पहाड़ के विकास को कर्मयोगी स्व. सोबन सिंह जीना के विचार आज भी प्रासंगिक

अल्मोड़ा। प्रसिद्ध समाजसेवी और पूर्व पर्वतीय विकास मंत्री स्व. सोबन सिंह जीना की 116 वीं जयंती पर उन्हें याद किया गया। सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय परिसर में उत्तराखण्ड की राजधानी गैरसैंण: तब, अब और कब विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। इस मौके पर इंटर कॉलेज बागेश्वर के प्रधानाचार्य अब्ब्ल सिंह तोपाल को जीना अवार्ड से सम्मानित किया गया।

मुख्य वक्ता प्रखर राज्य आंदोलनकारी पीसी तिवारी ने कहा पर्वतीय कृषि, किसान, शिक्षा और भूमि के संबंध में स्व. जीना के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा गैरसैंण राजधानी के बगैर उत्तराखंड राज्य अपूर्ण है। पर्वतीय क्षेत्र में स्कूलों और महाविद्यालय की स्थापना में कर्मयोगी जीना का महत्वपूर्ण योगदान रहा। स्व. जीना शिक्षा को वंचितों की ताकत बताते थे। उन्होंने जीवन पर्यत्न धर्म और जाति को राजनीति का औजार नहीं बनाया। वह सदैव उत्तराखंड के संसाधनों पर स्थानीय लोगों के अधिकार के पैरोकार रहे। वन अधिनियम लागू होने से पूर्व से ही वह गोचर, पनघट, बेनाप भूमि पर स्थानीय लोगों के अधिकार, कृषि और संसाधनों पर स्थानीय लोगों की भागीदारी के पक्षधर थे।

 

तिवारी ने गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थाई राजधानी घोषित नहीं करना तत्कालीन सरकार की ऐतिहासिक भूल बताया। उन्होंने कहा गैरसैंण केवल एक स्थान नहीं उत्तराखंड आंदोलन की अवधारणा, राज्य की आत्मा जन विश्वास का प्रतीक है। राज्य गठन के 25 साल बाद भी स्थाई राजधानी नहीं बन पाना अब तक सत्ता में काबिज रही सरकारों की नाकामी है।

शोभन सिंह जीना न्यास के तत्वावधान हुए कार्यक्रम का संचालन एड. गोविन्द भण्डारी एवं प्रो बीडीएस नेगी के संयोजन में हुआ। अध्यक्षता पूर्व विस उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान ने की।

 

कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट ने राज्य के विकास के लिये ठोस ब्लूप्रिंट की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि विवि को संसाधनों, नियमित फैकल्टी और आधारभूत सुविधाओं की सख्त जरूरत है। उन्होंने घोषणा की कि अगले वर्ष से सोबन सिंह जीना जयंती विवि के सभी महाविद्यालयों एवं परिसरों में मनाई जाएगी। इस अवसर पर विभिन्न स्कूलों के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।

 

कार्यक्रम में महापौर अजय वर्मा, पूर्व विधायक रघुनाथ सिंह चौहान, डा. जेसी दुर्गापाल, जमन सिंह बिष्ट, बिट्टू कनार्टक, शोभा जोशी, प्रो बीडीएस नेगी, सुरेश सुयाल आदि ने विचार रखे। समापन पर दयाकृष्ण काण्डपाल ने सभी का आभार जताया।

 

जीना की मूर्ति कर किया माल्यार्पण

अल्मोड़ा। जयंती पर एसएसजे परिसर में स्व. जीना की मूर्ति पर माल्यार्पण कर समाज निर्माण में उनके योगदान को याद किया। कार्यक्रम में परिसर निदेशक प्रो प्रवीण सिंह बिष्ट, कुलानुशासक डॉ दीपक, प्रो रूबीना अमान, प्रो अखिलेश कुमार नवीन, प्रो निर्मला पंत, लियाकत अली, रणजीत सिंह बिष्ट, डॉ देवेंद्र सिंह धामी, डॉ पारुल सक्सेना, डॉ प्रतिभा फुलोरिया, डॉ मनोज बिष्ट, डॉ गौरव कर्नाटक, मनीष तिवारी, हेम पांडे, डॉ सबीहा नाज सहित परिसर के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षणेत्तर कर्मचारी, विद्यार्थियों ने पुष्पार्पण किया।

 

 

 

 

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