-गेल गाला सेबों की पैदावार से बदलेगी पहाड़ के किसानों की तकदीर
अल्मोड़ा। जिले में सेब उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सेब के नए और हाई-टेक घनत्व वाले उद्यान स्थापित किए जाएंगे। इन बागानों में उन्नत किस्म के विदेशी पौधे किंग रॉट, गेल गाला आदि लगाकर जहां सेब उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की तकदीर भी बदलेगी।
दरअसल, पहाड़ में खेती मानूसन आधारित है। समय पर बारिश न होने के कारण खेती सूखने से किसानों को नुकसान झेलना पड़ता है। ऐसे में पारंपरिक खेती के अलावा किसान सेब उत्पादन कर अपनी आर्थिकी सुधार सकते हैं।
बागवानी को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग मिशन एप्पल योजना के तहत लमगड़ा और ताड़ीखेत विकासखंड में पांच एकड़ में सेब के नए उद्यान स्थापित करेगा। सेब के नए बगीचे स्थापित करने के लिए सरकार किसानों को 60 फीसदी तक अनुदान प्रदान कर रही है जबकि 40 फीसदी धनराशि स्वयं किसान वहन करेगा। संवाद
इन उन्नत किस्म के सेबों की होगी खेती
सेब के नए उद्यानों में गेल गाला, जीरो माइन, रेडम गाला, रेड चीफ, किंग रॉट, स्कार्लेट, सिनीको गाला आदि उन्नत किस्म के सेबों की खेती की जाएगी। उद्यान स्थापना के दूसरे साल ही ये प्रजातियां फल देने लगती हैं। गेल गाला सेब की गहरे लाल रंग और कुरकुरी किस्म है। यह रॉयल गाला का ही एक उन्नत रूप है जो बेहतर मिठास के लिए जानी जाती है। स्कार्लेट सेब की प्रजाति गाढ़े मीठे स्वाद और रसीलेपन के लिए प्रसिद्ध है। मध्यम आकार के इस सेब की खेती ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में भी की जा सकती है।
पर्वतीय क्षेत्र में रुकेगा पलायन
वर्ष 2030-31 तक प्रदेश को सेब उत्पादन के मामले में नया हब बनाने और इसका सालाना टर्नओवर 2000 करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार की इस पहल से पर्वतीय क्षेत्र में गांवों से पलायन की रोकथाम में भी मदद मिलेगी। फिलहाल प्रदेश में वर्तमान में 11766.72 हेक्टेयर क्षेत्र में सेब की खेती की जा रही है, जिससे 44100.05 मीट्रिक टन उत्पादन हो रहा है।
जिले में सघन सेब की बागवानी को बढ़ावा दिया जा रहा है। मिशन एप्पल योजना के तहत 5 एकड़ में सेब के नए उद्यान स्थापित किए जाएंगे। सेब की खेती से किसानों की आय में वृद्धि होगी, जिससे वह आत्मनिर्भर बनेंगे और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा।
-डॉ. नरेंद्र कुमार, मुख्य उद्यान अधिकारी, अल्मोड़ा।
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