अल्मोड़ा: पर्वतीय जिलों समेत अल्मोड़ा में लगातार बढ़ रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और उसकी प्रभावी रोकथाम के लिए जिलाधिकारी अंशुल सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में इस क्षेत्र में कार्य कर रहे सामाजिक एवं पर्यावरण कार्यकर्ताओं, प्रगतिशील किसानों और विशेषज्ञों के अनुभवों, व्यावहारिक सुझावों तथा उनके स्तर पर किए जा रहे प्रयासों की जानकारी ली गई। इस दौरान मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए प्रभावी उपायों को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चयनित क्षेत्रों में लागू कर उनकी उपयोगिता और सफलता का परीक्षण करने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
डीएम अंशुल सिंह ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष पहाड़ी क्षेत्रों के लिए एक गंभीर और लगातार बढ़ती चुनौती है। इसका समाधान केवल परंपरागत उपायों से संभव नहीं है, बल्कि स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों, वन्यजीवों की गतिविधियों और ग्रामीणों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक एवं प्रभावी मॉडल विकसित करने की आवश्यकता है।
उन्होंने वन विभाग, उद्यान विभाग और इस विषय पर लंबे समय से कार्य कर रहे लोगों के अनुभवों का समन्वय करते हुए ऐसे उपायों की पहचान करने पर जोर दिया, जिन्हें पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जा सके। सफल परिणाम मिलने पर इन मॉडलों को जिले के अन्य प्रभावित क्षेत्रों में भी विस्तार दिया जाएगा।
बैठक में वन्यजीवों के आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आने की घटनाओं को कम करने के लिए जंगलों के भीतर फलदार पौधों के रोपण की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। अधिकारियों, पर्यावरण व सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना रहा कि जंगलों में वन्यजीवों के लिए पर्याप्त प्राकृतिक भोजन उपलब्ध होने से उनके गांवों और खेतों की ओर आने की घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।
इसके अलावा कृषि और बागवानी क्षेत्रों को जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए तारबाड़ की व्यवस्था में क्लस्टर आधारित प्रणाली अपनाने पर विशेष जोर दिया गया। इस व्यवस्था के तहत अलग-अलग खेतों में बाड़ लगाने के बजाय प्रभावित क्षेत्रों को समूह के रूप में चिह्नित कर सामूहिक और अधिक प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
डीएम ने संबंधित विभागों को बैठक में प्राप्त सभी सुझावों की व्यवहारिकता का परीक्षण करने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ठोस एवं प्रभावी प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पायलट स्तर पर जो उपाय सफल सिद्ध होंगे, उसके परिणाम से शासन को अवगत कराया जाएगा। और चरणबद्ध तरीके से जिले के मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी रामजीशरण शर्मा, संभागीय वनाधिकारी अभिमन्यु, प्रदीप धौलाखंडी, जिला उद्यान अधिकारी युवराज, प्रगतिशील किसान प्रेम गिरी गोस्वामी, सामाजिक एवं पर्यावरण कार्यकर्ता ईश्वर जोशी, पी.सी. तिवारी, हिमांशु लटवाल समेत कई विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
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