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लापरवाही:: मानसून नजदीक, अल्मोड़ा में ड्रेनेज सिस्टम का काम अब भी अधूरा

तीन साल में 39 नालों में से केवल 11 नालों का हो पाया निर्माण, पर्याप्त बजट के बावजूद योजना का अधूरा रहना चिंताजनक

 

अल्मोड़ा। मानसून सीजन से निपटने के लिए जिला प्रशासन द्वारा जहां संबंधित विभागों को तैयारियां मुकम्मल करने के लिए लगातार दिशा निर्देश जारी किए जा रहे हैं वही, नगर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण ड्रेनेज सिस्टम को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। पिछले तीन साल से इस योजना में काम कछुआ गति से चल रहा है जिसका नतीजा यह है कि 39 नालों में से अब तक केवल 11 नालों का पूर्ण निर्माण हो पाया है। जबकि अन्य कुछ नालों में कार्य गतिमान तो कुछ नालों में मैनपॉवर व अन्य वजह से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।

अल्मोड़ा में पानी निकासी को तीन साल पहले 39 नालों के लिए 19.76 करोड़ मंजूर हुआ था, लेकिन अभी तक केवल 11 नाले ही तैयार हो सके हैं। निर्माण की धीमी प्रगति को लेकर शासन और प्रशासन संबंधित विभागों के खिलाफ क्यों कार्रवाई नहीं कर रहा है। इसका जवाब किसी के पास नहीं है। अल्मोड़ा काफी प्राचीन बसावट वाला नगर है। पानी निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने से आवासीय भवनों को काफी नुकसान पहुंचता है।

2010 और 2013 की आपदा में शहर के बड़े हिस्से में काफी नुकसान उठाना पड़ा था। ड्रेनेज सिस्टम ठीक करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तीन साल पहले नाला निर्माण की योजना मंजूर की थी। 19.76 करोड़ से नगर में अलग-अलग स्थानों पर 39 नालों का निर्माण किया जाना था। नाले बनाने के लिए सिंचाई विभाग को 18.13 करोड़ और पुराने नालों से पेयजल लाइन हटाने के लिए जल संस्थान को 1.62 करोड़ धनराशि स्वीकृत है। तीन साल बाद केवल 11 नाले ही तैयार हो सके हैं जबकि 16 नालों पर साठ फीसदी काम शेष है। पेयजल लाइन शिफ्ट नहीं होने और अन्य कारणों से 11 नालों का निर्माण कार्य ही शुरू नहीं हुआ है।

वर्षा काल शुरू होने में कुछ ही समय बचा है। सरकार और प्रशासन समय-समय पर बैठकें कर समय पूर्व ही जरूरी तैयारी पूरी करने का निर्देश संबंधित विभागों को जारी कर रहा है, ताकि अत्यधिक बारिश अथवा अन्य कारणों के चलते संभावित नुकसान से बचा जा सके। निर्माण कार्य क्यों पूरा नहीं हो रहा है इसे सरकार और प्रशासन गंभीरता से नहीं ले रहा है। पर्याप्त बजट होने के बाद भी गंदे पानी की निकासी की महत्वाकांक्षी योजना का समय पर नहीं बन पाना चिंताजनक है।

अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग, मोहन सिंह रावत ने बताया कि नगर में 39 नाले बनाने को सरकार से 19.76 करोड़ मंजूर हैं। सिंचाई विभाग को अब तक 7.91 करोड रुपए अवमुक्त हुए हैं। इसमें से 1.62 करोड़ जल संस्थान को उपलब्ध कराया गया है। सिंचाई विभाग के पास 6.41 करोड़ के सापेक्ष 6.20 करोड़ खर्च कर दिया है। 1.62 करोड़ से जल संस्थान ने पूर्व में निर्मित 11 नालों से होकर गुजर रही पेयजल लाइनों को हटाना था, लेकिन जल संस्थान ने अब तक लाइन शिफ्ट नहीं की है। इस कारण 11 नालों में काम शुरू नहीं हो सका है। पानी की लाइन हटने के बाद ही काम शुरू हो सकता है। 11 नाले तैयार हो चुके हैं। शेष 16 पर 50 फीसदी काम हो गया है। बचा काम भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा।

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