विशेषज्ञ चिकित्सकों के 138 के सापेक्ष 101 पद रिक्त, सरकार के बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के दावे साबित हो रहे खोखले
अल्मोड़ा। सरकार लोगों को राज्य के अस्पतालों में अस्पतालों में बेहतर सुविधाएं देने के दावे करती है और व्यवस्था को बेहतरीन बनाने के लिए कागजी निर्देश भी जारी करती रहती है, लेकिन धरातल पर वास्तविकता एकदम अलग है।
जिले के अस्पतालों में डॉक्टर्स के स्वीकृत 302 पदों के सापेक्ष 65 फीसदी से अधिक पद रिक्त चल रहे हैं। और सरकारी फाइलों में मौजूद 46 डॉक्टर अलग-अलग कारण से सेवा नहीं दे रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, जिले में 75 अस्पताल संचालित हैं। इनमें समुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या नौ है। ए श्रेणी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या 59 और बी श्रेणी के सात पीएचसी हैं। इन अस्पतालों में डॉक्टरों के 302 पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में 99 डॉक्टर ही सेवा दे रहे हैं। 28 डॉक्टर पीजी कोर्स में गए हैं और 18 लंबे समय से अनुपस्थित चल रहे हैं।
विशेषज्ञ डॉक्टर के 138 के सापेक्ष 101 पद खाली है, 37 डॉक्टर कार्यरत हैं। एमबीबीएस सामान्य के स्वीकृत 164 पदों के सापेक्ष 56 पद खाली हैं। स्थिति यह है ताकुला और लमगड़ा अस्पताल किसी तरह व्यवस्था में चल रहा है। गंभीर बीमारियों में विशेषज्ञ डॉक्टर तो दूर दूरस्थ क्षेत्रों में सामान्य रोगों में भी लोगों को उपचार की सुविधा राम भरोसे है। जब स्वास्थ्य सेवा ही बीमार हो तो जनता के उपचार की कितनी कारगर व्यवस्था होगी, समझा जा सकता है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नवीन चंद्र तिवारी ने कहा कि जिले में स्वीकृत पदों के सापेक्ष डॉक्टर्स की कमी वास्तव में चिंताजनक है। उपलब्ध डॉक्टर अपनी ओर से लोगों को भरपूर स्वास्थ्य सुविधा दे रहे हैं। अस्पतालों में तैनात फार्मासिस्ट भी सहयोग कर रहे हैं। डॉक्टरों की तैनाती को विभाग समय-समय पर शासन से पत्राचार करता रहा है। डॉक्टरों की नियुक्ति शासन स्तर से ही होती है। उम्मीद है जल्द ही नए डॉक्टर मिलने पर व्यवस्थाएं पटरी पर आ जाएगी।
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