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ग्रामीण जनता से डरी हुई है भाजपा सरकार इसलिए चुनाव से भाग रही: हरीश रावत

अल्मोड़ा। नैनीताल हाईकोर्ट की ओर से त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव पर रोक लगाई गई है। इस मामले में अब सियासत भी गरमा गई है पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पंचायत चुनाव को लेकर जारी आरक्षण रोस्टर पर तमाम सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता में आसीन भाजपा सरकार मनमाने तरीके से चुनाव कराना चाहती थी लेकिन हाईकोर्ट ने सरकार की मनमानी पर रोक लगा दी।

पूर्व सीएम हरीश रावत ने धामी सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि चुनाव पहले से एक साल विलंब हो चुके है। सरकार अब भी चुनाव नहीं कराना चाहती और जानबूझकर इस मामले को उलझा रही है। भाजपा के सत्ता में आने के बाद महंगाई आसमान छू रही है बेराजगारों की लंबी फौज खड़ी है गांवों में विकास नहीं हो रहा है और भ्रष्टाचार चरम पर है। इसलिए भाजपा ग्रामीण जनता से डरी हुई है कि चुनाव हुए तो जनता उनके खिलाफ वोट करेगी।

पूर्व सीएम रावत ने कहा कि सरकार द्वारा 2016 के पंचायती राज कानून के तहत आरक्षण के लिए बनाये गए चक्र को शून्य कर दिया गया और नये सिरे से चक्र बनाने का काम किया, जिसमें कई विसंगतियां है। चक्र तोड़ने से कई जिले, क्षेत्र व गांव ऐसे रह जाएंगे जिन्हें आरक्षण का लाभ मिलेगा ही नहीं। इससे साबित होता है कि कही न कही सरकार की नियत में खोट है। सरकार ने पंचायत चुनाव के पूरे मामले को इस तरह उलझाया कि मामले में न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा। सरकार ने कांग्रेस और ग्रामीणों की आपत्तियों को नहीं सुना, जिसके चलते लोगों को कोर्ट की शरण लेनी पड़ी।

पूर्व सीएम रावत ने कहा कि वह न्यायालय से आग्रह करना चाहते हैं कि इन सभी बातों का संज्ञान लेकर वह सरकार को फटकार लगाए। और एक हफ्ते की भीतर सभी खामियों को दुरुस्त कर नये सिरे से चुनावी प्रक्रिया शुरू करने का आदेश सरकार को दें। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया रूकनी नहीं चाहिए, कांग्रेस इस प्रक्रिया के पूरे होने के पक्ष में है।

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