नई दिल्ली: लद्दाख के जाने-माने पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने सीजेपी(CJP) के आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। वे दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे और वहां छात्रों के साथ भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं।
आज जब देश में पेपर लीक, नीट परीक्षाओं में धांधली और खराब शिक्षा नीति की वजह से 20 से ज्यादा छात्र परेशान होकर आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठा चुके हैं, ऐसे समय में सोनम वांगचुक का युवाओं के नाम यह संदेश हर किसी की आंखें खोल देने वाला है।
सोनम वांगचुक ने अपने भाषण में अपने जीवन का एक बड़ा राज खोला। उन्होंने बताया कि जब वे सिर्फ 11 साल के थे, तब स्कूल के माहौल और वहां की व्यवस्था से तंग आकर उन्होंने भी आत्महत्या करने की सोची थी। लेकिन फिर उन्हें समझ आया कि मुश्किलों से डरकर जान देने से कहीं बेहतर है कि अपनी पूरी जिंदगी इस खराब व्यवस्था को सुधारने में लगा दी जाए। जब उन्होंने सिर्फ अपने बारे में सोचना बंद किया और दूसरों के लिए जीने का फैसला किया, तो पूरी कायनात उनकी मदद के लिए आगे आ गई।
उन्होंने छात्रों से अपील करते हुए कहा कि मुश्किल हालात से घबराकर कभी भी अपनी जान मत गंवाओ, क्योंकि ऐसा करके आप सिर्फ अपने माता-पिता और समाज को रुलाते हैं और कुछ समय बाद लोग आपको भूल जाते हैं। इसके बजाय यह संकल्प लें कि आप अपनी जान नहीं देंगे, बल्कि इस देश और समाज को बेहतर बनाने के लिए अपनी जिंदगी लगाएंगे, ताकि आगे चलकर किसी भी दूसरे छात्र को मजबूरी में ऐसा आत्मघाती कदम न उठाना पड़े।
अनशन पर बैठने से पहले, वांगचुक ने CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके के साथ राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद जंतर-मंतर पर दो मिनट का मौन रखकर इस अनशन की शुरुआत की गई।
CJP का प्रदर्शन 20 जून को जंतर-मंतर पर शुरू हुआ था। यह आंदोलन परीक्षा व्यवस्था, खासकर NEET में कथित गड़बड़ियों के आरोपों के बीच शुरू हुआ। आंदोलन सरकार से जवाबदेही तय करने और कार्रवाई की मांग कर रहा है।
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