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उत्तराखंड की 7,813 ग्राम पंचायतों में तैयार होंगे ‘मंगल मित्र’, आपदा के समय संभालेंगे मोर्चा: लटवाल

-महिला और युवक मंगल दलों को SDRF, NDRF व जिला आपदा प्रबंधन विभाग देगा प्रशिक्षण
-पंचायतों को उपलब्ध कराए जाएंगे राहत-बचाव के उपकरण

 

अल्मोड़ा: उत्तराखंड की भौगोलिक एवं भूकंपीय संवेदनशीलता को देखते हुए प्रदेश सरकार आपदा प्रबंधन को ग्राम पंचायत स्तर तक मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। राज्य युवा कल्याण सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष (दर्जा राज्य मंत्री) कुन्दन लटवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन और मार्गदर्शन में ग्राम पंचायतों को आपदा प्रबंधन की स्थानीय इकाई मानकर महिला एवं युवक मंगल दलों को राहत एवं बचाव कार्यों का प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

 

जारी बयान में लटवाल ने कहा कि प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद मंगल दलों के सदस्य ‘मंगल मित्र’ के रूप में आपदा के समय सुरक्षा की पहली पंक्ति के तौर पर कार्य करेंगे। इसका उद्देश्य आपदा के बाद बाहरी राहत एवं रेस्क्यू टीमों के पहुंचने से पहले स्थानीय स्तर पर तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू करना है।

 

13,868 मंगल दलों को मिलेगा प्रशिक्षण

लटवाल ने बताया कि प्रदेश की 7,813 ग्राम पंचायतों में आपदा प्रबंधन की स्थानीय क्षमता को मजबूत किया जाएगा। वर्तमान में उत्तराखंड में 7,057 महिला मंगल दल और 6,811 युवक मंगल दल, यानी कुल 13,868 मंगल दल पंजीकृत हैं। प्रत्येक मंगल दल में 11 सदस्य होते हैं। ऐसे में इन दलों के सदस्यों को आपदा राहत एवं बचाव का प्रशिक्षण मिलने से प्रदेश में बड़ी संख्या में प्रशिक्षित स्थानीय स्वयंसेवक तैयार होंगे।

सरकार की योजना के तहत मंगल दलों को एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और जिला आपदा प्रबंधन विभाग के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही ग्राम पंचायतों में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा, ताकि आपदा की स्थिति में स्थानीय स्तर पर बिना देरी के रेस्क्यू और राहत अभियान शुरू हो सके।

 

वड्यूड़ा हादसे से सामने आई स्थानीय रेस्क्यू की जरूरत

कुन्दन लटवाल ने अपने बयान में हाल ही में हवालबाग विकासखंड के वड्यूड़ा में हुई प्राकृतिक आपदा का उल्लेख करते हुए कहा है कि इस घटना में तीन लोगों की मृत्यु हुई। उन्होंने बताया कि आपदा रात करीब दो बजे आई, जबकि रेस्क्यू टीम सुबह लगभग साढ़े छह बजे मौके पर पहुंच सकी।

 

उन्होंने कहा कि यदि ग्राम पंचायत स्तर पर प्रशिक्षित मंगल दल मौजूद होता तो आपदा के तत्काल बाद राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए जा सकते थे। ऐसे स्थानीय प्रशिक्षित स्वयंसेवक शुरुआती महत्वपूर्ण घंटों में प्रभावित लोगों तक पहुंचने, उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने और रेस्क्यू टीमों के पहुंचने तक आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। संभव है कि समय पर स्थानीय स्तर पर कार्रवाई से कुछ जानें बचाई जा सकतीं।

 

आपदा प्रबंधन के साथ पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ेंगे मंगल दल

लटवाल ने कहा कि मंगल दलों को केवल आपदा प्रबंधन तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और अन्य जनहित के कार्यों से भी जोड़ा जाएगा। उनका कहना है कि हिमालय की सुरक्षा के लिए यहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा और स्थानीय स्तर पर उनकी क्षमता को मजबूत करना जरूरी है।

 

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार सरलीकरण, समाधान और संतुष्टि के मंत्र के साथ जनसेवा के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का प्रयास है कि आपदा जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में राहत और बचाव व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाते हुए आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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