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केतन हत्याकांड: अल्मोड़ा में जोरदार प्रदर्शन, प्रदर्शनकारियों ने व्यवस्था की संवेदनहीनता पर उठाए सवाल

अल्मोड़ा: टिहरी गढ़वाल के देवल गांव में युवक केतन लाल की जातिवादी नफरत के चलते की गई निर्मम हत्या के खिलाफ रविवार को गांधी पार्क में उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के बैनर तले विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने इस घटना को देवभूमि पर गहरा धब्बा बताते हुए दोषियों को कड़ी सजा देने और मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने की मांग की।

 

धरने को संबोधित करते हुए उपपा नेता पी.सी तिवारी ने कहा, केतन की जिस बर्बरता से हत्या की गई, वह उत्तराखंड के माथे पर कलंक है। इस तरह की अमानवीय घटनाएं राज्य की अवधारणा के साथ खिलवाड़ हैं। यह किसी एक वर्ग का नहीं, पूरे समाज का मुद्दा है और समाज को एकजुट होकर इसका विरोध करना होगा। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि एक युवती से दोस्ती के नाम पर केतन के पांव में कील ठोकी गई, नाखून उखाड़े गए और रातभर तड़पा-तड़पाकर मार डाला गया। यह अमृत काल नहीं बल्कि आम नागरिकों, महिलाओं और कमजोर तबकों के लिए राहुकाल है।

 

उन्होंने कहा कि केतन के लिए न्याय की यह लड़ाई किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि हर उस इंसान की है जो इंसानियत, बराबरी और न्याय में भरोसा रखता है। इस तरह की तमाम घटनाओं पर पूरे समाज को गहराई से सोचने की जरूरत है और हर तरह की अमानवीय घटनाओं पर मुखर प्रतिरोध की जरूरत है।

 

धरनास्थल पर प्रदर्शनकारियों ने राज्य में सिलसिलेवार ढंग से हो रही हिंसक घटनाओं और प्रशासनिक निष्क्रियता पर गंभीर सवाल उठाए। वक्ताओं ने कहा कि राज्य में इस तरह की मानसिकता पुरानी और गहरी है। कफल्टा कांड से लेकर उपपा नेता जगदीश की हत्या जैसी घटनाएं बता रही हैं कि अपराधियों के हौसले बढ़ रहे हैं और समाज में नफरत का माहौल बनाया जा रहा है।

 

वक्ताओं ने कहा, केतन हत्याकांड बता रहा है कि समाज के कमजोर तबकों को बराबरी और गरिमा का अधिकार नहीं दिया जा रहा है और उनके प्रति अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। जन्म के आधार पर हर तरह के विभेद की मानसिकता को खत्म करने की ज़रूरत है। टिहरी के श्रीकोट में जीतेन्द्र दास, चम्पावत में रमेश राम, चौकी गाँव में बबीता विश्वकर्मा, देहरादून में एंजेल चकमा और हल्द्वानी में शुभम टम्टा पर हुए हमले इसी विभेदकारी, जातिवादी और पितृसत्तात्मक मानसिकता के उदाहरण हैं।

 

वक्ताओं ने आरोप लगाया कि व्यवस्था भी संवेदनहीन बनी हुई है। केतन के साथ गए दिवाकर को भी पीट-पीटकर अधमरा कर दिया गया, जिसका इलाज तक सरकार नहीं करा रही। जगदीश हत्याकांड में भी इंसाफ की प्रक्रिया धीमी रही और अब केतन के मामले में भी वही दोहराया जा रहा है।

 

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से केतन हत्याकांड की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कर दोषियों को शीघ्र कड़ी सजा दिलाने, केतन के परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने, घायल दिवाकर का इलाज का खर्च सरकारी धनराशि से वहन किए जाने और जगदीश हत्याकांड सहित हिंसा के सभी मामलों में त्वरित न्याय दिए जाने आदि मांगें उठाईं।

 

कार्यक्रम की अध्यक्षता अधिवक्ता गोविंद लाल वर्मा ने की। इस दौरान उपपा की वरिष्ठ नेत्री आनंदी वर्मा, डॉ रेनू, मो. शाकिब, एड जीवन चन्द्र, एड. पान, लल्लू लाल, हेम मिश्रा, किरन, भारती पांडे, ममता जोशी, विनीता आदि ने संबोधित किया। संचालन उपपा महासचिव नारायण राम ने किया।

 

धरने में डॉ प्रियंवदा, एड मनोज पंत, हेमा पांडे, विद्या कनवाल, अनीता बजाज, ममता बिष्ट, हीरा देवी, दीपांशु पांडे, कृष्णा, हरीश राम, मदन लाल, मोहन लाल टम्टा, गोपाल राम, निकिता, बद्रीश, अनीता कनवाल, एड गोपाल, नेहा, लता आदि मौजूद रहे।

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