विधायक बोले- शिक्षा व्यवस्था में हो सुधार, पेपर लीक मामलों पर धामी सरकार को घेरा
अल्मोड़ा: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को कांग्रेस विधायक मनोज तिवारी ने देश के युवाओं और प्रतिपक्ष की बड़ी जीत बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बेहतर शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य को लेकर छात्रों ने लंबे समय तक आंदोलन किया, लेकिन मोदी सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने के बजाय आंदोलनरत युवाओं पर लाठीचार्ज कराया।
कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में मनोज तिवारी ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शुरुआत से ही युवाओं के समर्थन में खड़े रहे और उनकी आवाज को लगातार सड़क से लेकर संसद तक उठाया। और आखिरकार युवाओं के आंदोलन और विपक्ष के दबाव के आगे केंद्र सरकार को झुकना पड़ा।
उन्होंने मांग करते हुए कहा कि देश की शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। संवैधानिक संस्थाओं और परीक्षा कराने वाली एजेंसियों को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाना चाहिए, ताकि किसी भी परीक्षा की गोपनीयता भंग न हो और युवाओं को उनकी मेहनत का उचित परिणाम मिल सके।
युवा आंदोलन के नाम पर विपक्ष द्वारा राजनीति किए जाने के सवाल पर मनोज तिवारी ने कहा कि आंदोलन की शुरुआत और नेतृत्व स्वयं युवाओं ने किया था। उन्होंने कहा कि जब सरकार अपनी हठधर्मिता पर अड़ी रही और आंदोलनरत युवाओं पर लाठीचार्ज किया गया, तब उनके भविष्य और अभिभावकों की चिंता को देखते हुए प्रतिपक्ष उनके समर्थन में उतरा। उन्होंने कहा कि यह राजनीति नहीं, बल्कि युवाओं के अधिकारों की लड़ाई है। साथ ही आरोप लगाया कि भाजपा अपनी गलतियों को स्वीकार करने के बजाय केवल आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति करती है।
इस दौरान विधायक तिवारी ने उत्तराखंड में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने में विफल रही है और भर्ती परीक्षाओं में लगातार अनियमितताएं सामने आ रही हैं। उन्होंने प्रदेश के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा देने की मांग की।
प्रेस वार्ता में कांग्रेस जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह भोज, जिलाध्यक्ष महिला कांग्रेस राधा बिष्ट, सहकारिता प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष हर्ष कनवाल, नगर अध्यक्ष तारा चंद्र जोशी आदि मौजूद रहे।
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