देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा के कई मौजूदा विधायकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पार्टी और संघ की ओर से कराए गए आंतरिक सर्वे में बड़ी संख्या में विधायकों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर नाराजगी सामने आई है। बताया जा रहा है कि भाजपा के लगभग दो-तिहाई विधायकों का अगला टिकट खतरे में पड़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा के हिस्से की 47 विधानसभा सीटों पर हुए सर्वे में 32 विधायकों के प्रदर्शन को लेकर लोगों ने असंतोष जताया है। पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि विधायकों के खिलाफ नाराजगी का असर 2027 के चुनाव में जीत की संभावनाओं पर पड़े। ऐसे में कई सीटों पर नए चेहरों को मौका देने पर गंभीर मंथन चल रहा है।
सरकार नहीं, स्थानीय विधायक बने असंतोष की वजह
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सर्वे में यह बात सामने आई कि लोगों में सरकार के कामकाज को लेकर अपेक्षाकृत कम नाराजगी है, जबकि कई क्षेत्रों में स्थानीय विधायकों के प्रति असंतोष अधिक है। लोगों ने विकास कार्यों को स्वीकार किया, लेकिन जनसंपर्क की कमी, स्थानीय मुद्दों की अनदेखी, प्रशासनिक ढिलाई और युवाओं में बढ़ती नाराजगी जैसे मुद्दे भी सामने आए हैं।
हारी हुई सीटों पर भी दिखी उम्मीद
बताया जा रहा है कि पिछले दो महीनों में प्रदेश की सभी 70 विधानसभा सीटों पर कार्यकर्ताओं, स्थानीय प्रभावशाली लोगों और आम जनता से फीडबैक लिया गया। रिपोर्ट में पिछले चुनाव में हारी गई 23 सीटों में से करीब 10 सीटों पर भाजपा की स्थिति पहले से बेहतर होने की संभावना जताई गई है।
सीएम धामी के लिए सुरक्षित सीट की तलाश
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पार्टी नेतृत्व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए एक सुरक्षित विधानसभा सीट के विकल्प पर भी विचार कर रहा है। उद्देश्य यह है कि मुख्यमंत्री पूरे प्रदेश में बिना किसी स्थानीय चुनावी दबाव के प्रचार कर सकें। उल्लेखनीय है कि 2022 में खटीमा से चुनाव हारने के बाद धामी ने चंपावत उपचुनाव जीतकर विधानसभा में वापसी की थी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उत्तराखंड की राजनीति में विपक्ष की मजबूती या कमजोरी से ज्यादा असर स्थानीय स्तर पर उम्मीदवारों के प्रति जनता की नाराजगी का होता है। इसी अनुभव को देखते हुए भाजपा समय रहते संगठन और प्रत्याशियों को लेकर रणनीति बनाने में जुटी हुई है।
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