अल्मोड़ा: उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी ने कहा कि देश की आज़ादी के 75 वर्ष और उत्तराखण्ड राज्य गठन के 26 वर्ष पूरे होने के बाद भी शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी आवश्यकताएं आज भी करोड़ों लोगों के लिए अधिकार नहीं, बल्कि संघर्ष का विषय बनी हुई हैं। जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह जनआंदोलन केवल पेपर लीक के खिलाफ नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार, सत्ता-नौकरशाही की मिलीभगत और जवाबदेहीविहीन व्यवस्था के खिलाफ देशव्यापी जनआवाज बनकर उभरा है।
पार्टी के केंद्रीय संयोजक पी.सी तिवारी तथा प्रधान महासचिव नरेश नौड़ियाल द्वारा जारी संयुक्त प्रेस बयान में कहा कि लगातार हुए पेपर लीक और भर्ती घोटालों ने लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। जब छात्र-युवाओं ने अपने अधिकारों की लड़ाई लोकतांत्रिक तरीके से लड़ी तो सरकार ने उनकी बात सुनने के बजाय दमन, पुलिस-प्रशासन और जांच एजेंसियों के सहारे आंदोलन को दबाने का प्रयास किया। लेकिन युवाओं ने साहस और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से यह साबित कर दिया कि अन्याय के सामने वे झुकने वाले नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा इस जनदबाव और जनता की एक महत्वपूर्ण नैतिक जीत है। लेकिन केवल एक मंत्री के इस्तीफे से व्यवस्था नहीं बदलती। जब तक भ्रष्टाचार की जड़ों पर प्रहार नहीं होगा, भर्ती प्रक्रियाएँ पूरी तरह पारदर्शी नहीं बनेंगी और दोषियों को कठोर दंड नहीं मिलेगा, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।
पार्टी ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य को बाजार के हवाले करने वाली नीतियों ने सामाजिक असमानता को बढ़ाया है। प्रत्येक बच्चे को समान, गुणवत्तापूर्ण और निशुल्क शिक्षा तथा प्रत्येक नागरिक को समान और निशुल्क स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। साथ ही रोजगार को मौलिक अधिकार घोषित करते हुए पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, समयबद्ध परीक्षाएँ, शीघ्र परिणाम और सम्मानजनक रोजगार की गारंटी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उपपा ने कहा कि देश की जनता लोकतंत्र के नाम पर बढ़ती तानाशाही, जनविरोधी नीतियों और नौकरशाही की मनमानी को अब स्वीकार नहीं करेगी। पार्टी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और भ्रष्टाचार के खिलाफ इस संघर्ष को सड़क से सदन तक पूरी मजबूती से आगे बढ़ाएगी और तब तक संघर्ष जारी रखेगी, जब तक व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन और जवाबदेही स्थापित नहीं हो जाती।
पार्टी ने इस संघर्ष को जनआंदोलन का स्वरूप देने वाले सभी छात्र-युवाओं, अभिभावकों, कर्मचारियों और नागरिकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह जीत अंत नहीं, बल्कि एक व्यापक परिवर्तन की शुरुआत है। अब लड़ाई केवल एक मंत्री के इस्तीफे की नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था के निर्माण की है जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार हर नागरिक का अधिकार हों, न कि चुनिंदा रसूखदार लोगों का विशेषाधिकार।
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