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अल्मोड़ा में मानव-वन्यजीव संघर्ष की खौफनाक तस्वीर, 7 महीने में 4 लोगों की मौत 26 घायल, मोहान बना सबसे संवेदनशील इलाका, पढ़िए यह खास रिपोर्ट

अल्मोड़ा: उत्तराखंड के शांत पहाड़ों पर इन दिनों डर और दहशत का साया मंडरा रहा है। इंसान और जंगली जानवरों के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है। जिससे यह संघर्ष अब एक गंभीर मुद्दा बन गया है। बात अगर पर्वतीय जनपद अल्मोड़ा की करें तो यहां मानव-वन्यजीव संघर्ष की तस्वीर काफी चिंताजनक है। साल 2026 के शुरुआती सात महीनों में ही 4 लोग वन्य जीव संघर्ष में अपनी जान गंवा चुके हैं जबकि 26 लोग इन हमलों में जख्मी हुए हैं। गांव की पगडंडियों से लेकर शहर की बस्तियों तक जंगली जानवरों का कहर लगातार जारी है।

 

इंसान और जंगली जानवरों के बीच का टकराव अब रोजमर्रा की खौफनाक सच्चाई बन चुकी है। साल 2026 के शुरुआती 7 महीने के सरकारी आंकड़े ही इस खतरे की भयावहता बताने के लिए काफी है। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई अंत तक अल्मोड़ा वन प्रभाग में बाघ, गुलदार के हमलों में 3 और सांप के डंसने से 1 व्यक्ति की मौत हो चुकी है जबकि 26 लोग घायल होकर जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ चुके हैं। घायल होने वाले सबसे ज्यादा मामले बंदरों के हमले और काटने से जुड़े हैं। यह आंकड़े वन्यजीव संघर्ष के खतरे की गंभीरता को भी बयां कर रहे हैं।

 

जंगलों की घटती धारण क्षमता बड़ा कारण

सवाल उठता है कि आखिर शांत दिखने वाले यह पहाड़ वन्यजीवों के खूनी अखाड़े में क्यों तब्दील हो रहे हैं।

सामाजिक व पर्यावरण कार्यकर्ता ईश्वर जोशी ने कहा, “वन्यजीव संघर्ष पीछे एक बड़ा कारण जंगलों की घटती धारण क्षमता और वन्य जीवों की बढ़ती आबादी है। जंगलों में जब प्राकृतिक भोजन और सुरक्षित आवास की किल्लत होती है तो खूंखार शिकारी सीधे आबादी वाले क्षेत्र का रुख करते हैं।” उनका यह भी कहना है कि, “जंगलों का वैज्ञानिक प्रबंधन सटीक गणना प्रभावी ठोस कदम इस टकराव को थाम पाना मुमकिन नहीं है। अगर भविष्य में मानव वन्यजीव संघर्ष को कम करना है तो जंगलों की धारण क्षमता बढ़ाने, वन्यजीवों की गणना के साथ ही ठोस प्रभावी कदम इस ओर उठाने होंगे।”

 

मोहान बना वन्यजीव संघर्ष का बड़ा हॉटस्पॉट

मानव वन्यजीव संघर्ष के लिहाज से अगर अल्मोड़ा जिले के सबसे संवेदनशील क्षेत्र की बात करें तो सल्ट का मोहन क्षेत्र इस खूनी संघर्ष का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। आंकड़ों पर गौर करे तो जंगली जानवरों के हमलों में जान गंवाने वाले 4 लोगों में 3 की मौत अकेले मोहान रेंज में दर्ज की गई है, विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की सीमा से सटा होने के चलते यहां बाघो की मूवमेंट लगातार बनी रहती है, तो वही गुलदार की दस्तक ने भी लोगों की रातों की नींद उड़ा दी है।

 

वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी, लगाए पिंजरे

वन्यजीवों के बढ़ते हमलों के बाद वन महकमा हरकत में आया है। बढ़ती घटनाओं को देखते हुए विभाग अलर्ट मोड पर है।

प्रभागीय वनाधिकारी वन प्रभाग अभिमन्यु ने कहा कि, “हमलावर जानवरों को पकड़ने के लिए मोहान में घटनास्थल व आस पास के क्षेत्रों में 9 और 2 अन्य इलाकों में पिंजरे लगाए गए हैं। साथ ही क्यूआरटी समेत वन विभाग की अन्य टीमें लगातार जंगली जानवरों के मूवमेंट वाले इलाकों में गश्त कर रही है।”

 

मानव वन्य जीव संघर्ष की बढ़ती घटनाएं इंसान और प्रकृति के बीच तेजी से बिगड़ते संतुलन का अलार्म है। अल्मोड़ा वन प्रभाग में चार मौत और 26 लोगों के घायल होने के आंकड़े इस चुनौती की गंभीरता को सामने रखते हैं। चार परिवारों और 26 घायलों की चीख साफ बता रही हैं कि यह समस्या सिर्फ अब वन विभाग की फाइलों तक सीमित नहीं रह सकती।

 

सरकार व सिस्टम के सामने बड़ा सवाल

मानव वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को रोकना इस समय सरकार व वन महकमे के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। अगर जल्द कोई ठोस नीति और स्थाई समाधान नहीं निकाला गया तो पहाड़ के इन खूबसूरत वादियो में इंसान की जिंदगी यूं ही दांव पर लगती रहेगी। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि इंसान और वन्यजीवों के बीच बढ़ते इस संघर्ष को रोकने के लिए सरकार और वन विभाग आने वाले दिनों में क्या ठोस कदम उठाते हैं।

 

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