-मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत के बाद भी नहीं सुधरे हालात
-पांच किमी पेयजल लाइन की जिम्मेदारी को लेकर विभागों में उलझा मामला
अल्मोड़ा: विकासखंड भैसियाछाना के बेलवाल गांव में बिजली और पेयजल संकट ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गांव में करीब एक सप्ताह से बिजली आपूर्ति ठप है, वहीं पेयजल लाइन भी लंबे समय से बदहाल पड़ी है। पानी की किल्लत के चलते ग्रामीण बरसात का पानी पीकर प्यास बुझाने को मजबूर हैं। लगातार बनी इस समस्या को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है।
ग्रामीणों के मुताबिक करीब एक सप्ताह से बिजली गुल होने के कारण जनजीवन पूरी तरह प्रभावित है। मोबाइल फोन चार्ज नहीं हो पा रहे हैं, जिससे बाहरी क्षेत्रों में रहने वाले परिजनों और रिश्तेदारों से संपर्क भी बाधित हो गया है। बरसात के मौसम में पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क, स्वास्थ्य और आपदा जैसी परिस्थितियों को देखते हुए मोबाइल संपर्क का टूटना ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
ग्रामीणों के मुताबिक, शिकायत के बाद विद्युत विभाग के कर्मचारी गांव पहुंचकर फॉल्ट तलाशने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। फॉल्ट कहां है, इसका पता लगाने में विभाग को भी परेशानी हो रही है। अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड, अल्मोड़ा कन्हैया जी मिश्रा ने बताया कि विद्युत लाइन में फॉल्ट की जांच की जा रही है।
बरसाती पानी के सहारे ग्रामीण
बिजली संकट के साथ गांव में पेयजल समस्या भी गंभीर बनी हुई है। बबुरियानायल-बेलवाल पेयजल योजना की लाइन लंबे समय से बदहाल बताई जा रही है। नियमित पेयजल आपूर्ति नहीं होने के कारण ग्रामीणों को प्राकृतिक जलस्रोतों और बरसाती पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के पानी से प्यास बुझाना मजबूरी बन गया है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरा भी बना हुआ है।
पांच किमी पेयजल लाइन, जिम्मेदारी पर विभागों में असमंजस
बेलवाल गांव की पेयजल समस्या का सबसे बड़ा कारण करीब पांच किलोमीटर लंबी पेयजल लाइन की जिम्मेदारी को लेकर बना असमंजस बताया जा रहा है। यह लाइन धौलछीना के नीचे स्थित एक गधेरे से पानी लेकर बेलवाल गांव तक पहुंचती है। ग्रामीणों के अनुसार कई वर्षों तक इसकी देखरेख जल संस्थान करता रहा और पेयजल का बिल भी जल संस्थान की ओर से लिया जाता था। बाद में जल संस्थान की ओर से मौखिक रूप से बताया गया कि लाइन सिंचाई विभाग को हैंडओवर कर दी गई है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि हैंडओवर से संबंधित कोई स्पष्ट लिखित दस्तावेज उनके सामने नहीं रखा गया है।
ग्रामीणों के मुताबिक जल जीवन मिशन के तहत भी इस लाइन की स्थिति सुधारने के लिए प्रभावी कार्य नहीं हुआ। नतीजा यह है कि पांच किलोमीटर लंबी पेयजल लाइन की जिम्मेदारी को लेकर विभागों के बीच स्थिति स्पष्ट नहीं है और ग्रामीण पानी के लिए परेशान हैं।
तीन माह पहले भी की थी शिकायत
पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य रमेश सिंह जड़ौत के अनुसार पेयजल समस्या को लेकर करीब तीन माह पूर्व मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। जड़ौत ने बताया कि सिंचाई विभाग की ओर से फोन पर कहा गया कि पेयजल लाइन ग्राम सभा के अंतर्गत आती है और इसे ब्लॉक स्तर से देखा जाएगा। वहीं ब्लॉक स्तर पर संपर्क करने पर कथित तौर पर बताया गया कि उक्त लाइन उनके पास है ही नहीं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल मौके पर टीम भेजकर बिजली आपूर्ति बहाल करने, पेयजल लाइन का स्थलीय निरीक्षण कराने और उसकी वास्तविक जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। साथ ही बबुरियानायल-बेलवाल पेयजल योजना को स्थायी रूप से दुरुस्त कर नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।
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