अल्मोड़ा: ताकुला विकासखंड के बसोली में एक दर्दनाक हादसे ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। खेत में काम कर रही तीन माह की गर्भवती महिला की सर्पदंश के बाद मौत हो गई। परिजन और स्थानीय लोग उन्हें तत्काल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ताकुला लेकर पहुंचे। लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी सांसें थम चुकी थीं।
बताया जा रहा है कि सांप के काटने के महज 10 से 15 मिनट के भीतर सोनी की हालत बिगड़ गई। इतनी कम अवधि में मौत होने से चिकित्सक भी हैरान हैं और मामले को फिलहाल संदिग्ध मान रहे हैं। मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
जानकारी के मुताबिक, मूल रूप से ग्राम हड़ोली निवासी आशीष भाकुनी का परिवार वर्तमान में बसोली में रहता है। गुरुवार दोपहर उनकी 36 वर्षीय पत्नी सोनी घर के पास खेत में काम कर रही थीं। स्थानीय लोगों के अनुसार खेत में उन्हें सांप ने काट दिया। सोनी की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और बिना देर किए उन्हें उपचार के लिए पीएचसी ताकुला ले गए। लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
सोनी नारी शक्ति सीएलएफ बसोली में कार्यरत थीं। वह तीन माह की गर्भवती थीं। उनकी दो छोटी बेटियां हैं। एक बेटी कक्षा पांच और दूसरी कक्षा एक में पढ़ती है। मां की मौत के बाद दोनों मासूम बेटियों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार में मातम पसरा है और घटना से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। पंचायतनामा की कार्यवाही के बाद देर शाम शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
10-15 मिनट में मौत से डॉक्टर भी हैरान
पीएचसी ताकुला के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉक्टर कमलेश जोशी ने बताया कि जब परिजन महिला को अस्पताल लेकर पहुंचे, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। कुछ समय बाद महिला के पैर पर हल्का नीला निशान दिखाई दिया। ऐसे में सर्पदंश की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन महज 10 से 15 मिनट में मौत होना सामान्य सर्पदंश के मामलों से अलग है। उन्होंने बताया कि सर्पदंश में आमतौर पर कई तरह के लक्षण दिखाई देते हैं और इतनी जल्दी मौत होना असामान्य माना जाता है। फिलहाल मौत का स्पष्ट कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल सकेगा।
सांप काट ले तो क्या करें?
डॉ. कमलेश जोशी ने बताया कि सर्पदंश के बाद कई लोग घाव के आसपास कपड़ा या रस्सी कसकर बांध देते हैं। उन्होंने ऐसा करने से बचने की सलाह दी। उनका कहना है कि गलत तरीके से कसकर बांधने से रक्त संचार प्रभावित हो सकता है और गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।
डॉ. जोशी ने बताया कि सर्पदंश की स्थिति में सबसे जरूरी है कि घबराएं नहीं और मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाएं। घरेलू उपचार या झाड़-फूंक में समय गंवाने के बजाय चिकित्सकीय उपचार लेना चाहिए। सांप, कुत्ते या बंदर के काटने की स्थिति में घाव को तुरंत बहते पानी और साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए। अस्पताल में आवश्यकता के अनुसार एंटी-वेनम समेत जरूरी उपचार दिया जाता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि सर्पदंश के मामले में मरीज को शीघ्र अस्पताल पहुंचाएं। समय पर उपचार मिलने से जान बचाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
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