-घटना के बाद छात्रों और शिक्षकों में डर का माहौल
-अभिभावकों ने प्रशासन से कि जल्द ठोस कदम उठाने की मांग
अल्मोड़ा: नगर से लगे राजकीय इंटर कॉलेज लोधिया में बुधवार को बड़ा हादसा होने से टल गया। बच्चों की सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक बन चुके स्कूल के मुख्य भवन की छत का प्लास्टर अचानक भरभराकर नीचे गिर गया। प्लास्टर की चपेट में आने से एक शिक्षक बाल-बाल बच गए। घटना के बाद से छात्रों और शिक्षकों में भय का माहौल बना हुआ है।
जानकारी के मुताबिक, बुधवार को स्कूल की मुख्य बिल्डिंग स्थित स्टाफ रूम में शिक्षक अपना कार्य कर रहे थे। इसी दौरान एक शिक्षक कुर्सी से उठकर खिड़की खोलने के लिए गए। उनके उठने के कुछ ही देर बाद बारिश के कारण खतरनाक हो चुकी छत का प्लास्टर अचानक भरभराकर उसी कुर्सी पर जा गिरा, जिस पर कुछ देर पहले शिक्षक बैठकर अपना काम कर रहे थे। गनीमत रही कि प्लास्टर शिक्षक के ऊपर नहीं गिरा और वह बाल-बाल बच गए। घटना के बाद स्टाफ रूम में मौजूद शिक्षक कुछ देर के लिए सन्न रह गए।
स्कूल में हुई इस घटना ने छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खंडहरनुमा हो चुके इस सरकारी स्कूल में जर्जर भवनों के बीच छात्र और शिक्षक अपनी जान जोखिम में डालकर बैठने को मजबूर हैं। अभिभावकों का सवाल है कि आखिर कब तक उनके पाल्य और शिक्षक इन जर्जर छतों के नीचे रहने को मजबूर रहेंगे।
अभिभावकों ने प्रशासन से जर्जर हो चुकी बिल्डिंगों की मरम्मत कराने के साथ ही स्कूल के संचालन के लिए अस्थायी तौर पर शिफ्टिंग की व्यवस्था किए जाने की दिशा में जल्द ठोस कदम उठाने की मांग की है।
गौरतलब है कि जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने बीते दिवस स्कूल का स्थलीय निरीक्षण कर हालात का जायजा लिया था। निरीक्षण के दौरान डीएम ने पाया था कि स्कूल की कुछ बिल्डिंग वर्तमान में छात्रों और शिक्षकों के लिए सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने अधिकारियों को नियमानुसार जर्जर भवनों का ध्वस्तीकरण करने और नए भवन की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए थे। डीएम के इस निरीक्षण और निर्देश के बाद छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों में उम्मीद जगी है।
जीआईसी लोधिया के मुख्य भवन के निर्माण को करीब 48 वर्ष पूरे हो चुके हैं। स्कूल की मुख्य बिल्डिंग काफी जर्जर हालत में है। इसके अलावा कई अन्य कक्षा-कक्ष और कार्यालय भी छात्रों व शिक्षकों के लिए असुरक्षित बने हुए हैं। स्कूल भवनों की जर्जर हालत के चलते हमेशा छात्रों और शिक्षकों के सिर पर खतरा मंडराता रहता है।
इस सरकारी स्कूल में पिछले दो-तीन वर्षों और उससे पहले भी कई भवनों का निर्माण किया गया था। नए निर्माण के बावजूद इनकी दीवारों और फर्श में बड़ी-बड़ी दरारें हैं। प्लास्टर गिरने के साथ ही बारिश के दौरान छतों से पानी टपकता है। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। डीएम के निरीक्षण के दौरान अभिभावकों ने उनसे इन निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग भी की थी।
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