अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, हवालबाग में जलवायु परिवर्तन और आजीविका के लिए आय सृजन विषय पर कृषक कार्यशाला हुई। मुख्य अतिथि सहायक महानिदेशक (बागवानी संभाग) डॉ. सुधाकर पांडे ने पर्वतीय किसानों से अधिक आय अर्जन करने के लिए उच्च मूल्य वाली एवं दुर्लभ फसलों की खेती अपनाने की अपील की।
उन्होंने कृषकों को उनके उत्पाद से अत्यधिक लाभ कमाने के लिए केवल उत्पादक ही नहीं, बल्कि उद्यमी बनकर मूल्य श्रृंखला में भागीदारी करने के लिए प्रेरित किया। संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मीकांत ने जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन के लिए स्थानीय फसलों के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने यह भी बताया कि इन फसलों का मूल्य संवर्धन एक महत्वपूर्ण रणनीति सिद्ध हो सकती है। स्थानीय फसलों को बढ़ावा देने से न केवल कृषकों की आय बढ़ सकती है, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों को कम करने में भी सहायक हो सकता है।
शीतलाखेत मॉडल के संयोजक गजेंद्र पाठक ने जलवायु परिवर्तन की समझ एवं जलवायु-हितैषी अनुकूलन रणनीति विषय पर और हिमोत्थान सोसायटी के परियोजना अधिकारी राजेंद्र बोरा ने आजीविका एवं आय सृजन के माध्यम से जलवायु अनुकूलन विषय पर व्याख्यान दिया। वैज्ञानिकों ने लहसुन के बुलबिल से उत्पादन की विधि भी कृषकों के साथ साझा की। कार्यशाला में फसल उत्पादन विभागाध्यक्ष डॉ. बृज मोहन पांडेय, सामाजिक विज्ञान अनुभाग प्रभारी डॉ. कुशाग्रा जोशी, वर्षा चौहान आदित मौजूद रहे।
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