देहरादून: उत्तराखंड उपचुनाव 2024 में बीजेपी को बड़ा झटका लगा है। बीजेपी मंगलौर और बदरीनाथ दोनों विधानसभा सीटें हार गई है। चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंकने के बावजूद भाजपा को दोनों सीटों से हाथ धोना पड़ा। उत्तराखंड के राजनीतिक इतिहास में जब भी उपचुनाव हुए, उसमें अधिकांश बार सत्ता पक्ष की पार्टी ही उपचुनाव जीतते आई हैं। सत्ता में होते हुए भी बीजेपी कैसे इन दोनों सीटों पर हार गई, ये बीजेपी के लिए बड़ी चिंता का विषय है।
बदरीनाथ चुनाव जनता पर थोपा गया
मंगलौर सीट पर बसपा विधायक के निधन के बाद इस सीट पर उपचुनाव कराया जाना था, लेकिन बदरीनाथ में परिस्थिति जबरन पैदा की गई। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस विधायक राजेंद्र भंडारी भाजपा में शामिल हो गए। भंडारी खुद तो चले गए, लेकिन कार्यकर्ताओं में रोष रहा और इसे कांग्रेस ने मुद्दा बनाया। नतीजन यह भाजपा की हार तो कांग्रेस की कामयाबी का राज बन गया।
कांग्रेस विधायक का नाटकीय तरीके से बीजेपी में शामिल होना
नाटकीय तरीके से कांग्रेस विधायक का भाजपा में शामिल होना जनता को रास नहीं आया। राजेंद्र भंडारी तो भाजपा में चले गए लेकिन समर्थक कांग्रेस में ही रह गए। बताया जा रहा है कि भंडारी के भाजपा में आने से बदरीनाथ के भाजपा नेता और कार्यकर्ता खुश नहीं थे। उन्होंने खुले तौर पर तो इसका विरोध नहीं किया, लेकिन नतीजे संकेत दे रहे हैं। लोकसभा चुनाव से पहले गढ़वाल मंडल की यही एकमात्र सीट थी, जो कांग्रेस के पास थी। लेकिन, कांग्रेस विधायक राजेन्द्र भंडारी भाजपा में शामिल हो गए। यह सब इतने नाटकीय तरीके से हुआ कि, जो कांग्रेस विधायक राजेंद्र भंडारी 24 घंटे पहले जिन कपड़ों में बीजेपी के विरोध में आक्रामक प्रचार कर रहे थे, वही भंडारी उन्हीं कपड़ों में दिल्ली में भाजपा की सदस्यता ले लेते हैं। मजेदार बात यह है कि भाजपा संगठन को इसकी हवा भी नहीं लगती है। शायद इस बात को न तो भाजपा के कार्यकर्ता ही पचा पाए और न ही बदरीनाथ की जनता।
मंगलौर सीट पर जातीय समीकरण नहीं भेद पाई बीजेपी
हरिद्वार जिले की मंगलौर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी ने हरियाणा के पूर्व मंत्री करतार सिंह भड़ाना को मैदान में उतारा था। करतार सिंह भड़ाना की सीधी टक्कर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता काजी निजामुद्दीन से थी। एक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मंगलौर विधानसभा सीट पर 61,000 मुस्लिम वोटर है। इस सीट पर कांग्रेस को जातीय समीकरणों का फायदा मिला। मंगलौर सीट एक ऐसी सीट है जो भाजपा कभी नहीं जीत पाई है। अल्पसंख्यक बहुल इस सीट पर भाजपा ने करतार सिंह भड़ाना को टिकट देकर कुछ हद तक गुर्जर वोट को अपने पक्ष में किया। अल्पसंख्यक वोट बसपा ओर कांग्रेस में बंटा जरूर, लेकिन इस बार काजी ने यह सीट जीत ली।
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