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राज्य आंदोलनकारी और UKD नेता गिरीश साह का निधन, विभिन्न संगठनों ने जताया शोक

अल्मोड़ा। उत्तराखंड क्रांति दल के वरिष्ठ नेता और राज्य आंदोलनकारी गिरीश साह (71) का निधन हो गया है। उनके निधन पर कई संगठनों और राज्य आंदोलनकारियों ने शोक जताया है।

जानकारी के मुताबिक, गिरीश साह की गत शुक्रवार रात अचानक तबीयत बिगड़ गई। उनके परिजन उपचार के लिए उन्हें हल्द्वानी के एक अस्पताल ले गए। शनिवार तड़के करीब चार बजे अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। वें अपने पीछे अपनी पत्नी, पुत्र वैभव शाह और पुत्री निवेदिता को छोड़ गए हैं। उनके निधन की सूचना के बाद नगर में शोक की लहर दौड़ गई। शनिवार को विश्वनाथ घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

उत्तराखंड क्रांति दल ने शोक सभा आयोजित कर​ दिवंगत गिरीश साह की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और शोक संतप्त परिवार के लिए अपनी संवेदना जताई। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि दिवंगत गिरीश साह 1979 में उक्रांद के गठन से ही दल से जुड़े। उन्होंने उक्रांद के जिले से लेकर केंद्रीय पदाधिकारी के रूप में कार्य किया। राज्य आंदोलन के दौर में साह ने पौड़ी कमिश्नरी में इंद्रमणि बड़ौनी के साथ धरने में सहभाग किया। उनके निधन को उक्रांद के लिए भारी क्षति बताया।

शोकसभा में दिनेश जोशी, गिरीश गोस्वामी, मोहित साह, पीसी तिवारी, सुजीत टम्टा, दयाकृष्ण कांडपाल, शैलेन्द्र टम्टा, भुवन जोशी, गोपाल मेहता, दीवान बनौला, शिवराज बनौला, अभिषेक बनौला, सुशील शाह, भैरव गोस्वामी, शुभांशु रौतेला, अमित बिष्ट, विनोद वैष्णव आदि लोग मौजूद रहे।

उधर, राज्य आंदोलनकारी ब्रह्मानन्द डालाकोटी, महेश परिहार, गोपाल मेहता, शिवराज बनौला, मुमताज कश्मीरी, गजेन्द्र मेहता ने राज्य आंदोलनकारी गिरीश साह के निधन पर गहरा शोक प्रकट किया है। शोक संदेश में कहा कि गिरीश साह उत्तराखंड राज्य आंदोलन में कई वर्षों तक सक्रिय रहे तथा दर्जनों बार गिरफ्तार हुए और जेल भी गये। लेकिन फिर भी शासन—प्रशासन की हीलाहवाली के चलते वें राज्य आंदोलनकारी चिन्हित नहीं हो पाये। पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे गिरीश शाह राज्य के हितों के अंतिम क्षणों तक संघर्षरत रहे।

उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने उत्तराखंड आंदोलन के मजबूत स्तंभ गिरीश शाह के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने कहा कि गिरीश साह अपने छात्र जीवन से ही उत्तराखंड आंदोलन के समर्थक और उक्रांद के सक्रिय कार्यकर्ता रहे। उनका प्रतिष्ठान देवदार होटल उत्तराखंड राज्य आंदोलन के कार्यकर्ताओं का केंद्र भी था।

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