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हम लड़ते रैयां भुला, हम लड़ते रूंलो… पुण्यतिथि पर याद किए गए जनकवि गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’

अल्मोड़ा। राज्य आंदोलनकारी, रंगकर्मी, साहित्यकार, जनकवि गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ को उनकी 15 वीं पुण्य तिथि पर याद किया गया। आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न संगठनों के लोगों ने जनगीत गाकर उन्हें याद किया। गिर्दा के गीत ‘हम लड़ते रैयां भुला हम लड़ते रूंलो’ और ‘जैता इक दिन तो आलो दिन यो दुणीं में’ आदि गाने गाकर गिर्दा को श्रद्धांजलि दी।

 

कार्यक्रम में राज्य आंदोलनकारी पीसी तिवारी ने कहा कि गिर्दा की रचनाओं में जल, जंगल, जमीन, नदी, पर्यावरण, हिमालय, उत्तराखंड की विकास नीति आदि को लेकर स्पष्ट लक्ष्य झलकता है। भ्रष्टाचार को लेकर उन्होंने समाज को सदैव जागरूक किया। राज्य बनने के बाद भी राज्य में व्यवस्थाएं तेजी से बिगड़ रही हैं।

 

सामाजिक व पर्यावरण कार्यकर्ता ईश्वर जोशी ने कहा गिर्दा हमेशा जल-जंगल जमीन की बात कहते रहे। वह राज्य के संसाधनों की लूट-खसोट के खिलाफ लोगों को जागरूक करने, राज्य में अवैज्ञानिक विकास से हो रहे विनाश को रोकने के लिए भी लोगों को सतर्क करते रहे। उत्तराखंड प्राकृतिक आपदा की जो मार झेल रहा है इसके लिए कहीं न कहीं प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुन दोहन जिम्मेदार है। प्राकृतिक आपदा के दौर में गिर्दा के रचे गीत बहुत ही प्रासंगिक हैं।

 

कार्यक्रम में गिर्दा के साथ आंदोलन के साथी रहे लोगों ने गिर्दा के साथ आंदोलन के संस्मरण साझा किए। इस दौरान कलाकारों ने कई जन गीत गाकर गिर्दा को याद किया। वरिष्ठ पत्रकार, रंगकर्मी नवीन बिष्ट के संचालन में हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता रेवती बिष्ट ने की।

 

कार्यक्रम में डॉ निर्मल जोशी, नीरज पंत, लता तिवारी, शीला पंत, कृष्ण मोहन सिंह बिष्ट, शेखर जोशी, नारायण थापा, जगत रौतेला, जगदीश जोशी, रमेश जोशी, चन्दन बोरा, रमेश पाण्डे राजन सहित कई लोग शामिल हुए।

 

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