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बड़ी खबर: प्राइमरी शिक्षकों की काउंसिलिंग मामला पहुँचा हाइकोर्ट, लापरवाही पर कोर्ट सख्त, दिए यह निर्देश

नैनीताल: हाईकोर्ट ने सहायक अध्यापक (प्राइमरी) भर्ती प्रक्रिया के लिए हुई काउंसिलिंग में अभ्यर्थियों को कम समय के कारण शामिल न हो पाने और उनके स्थान पर कम मैरिट बाले अभ्यर्थियों की काउंसिलिंग कराए जाने चयन होने के संवन्ध में दायर करीब 45 से अधिक अभ्यर्थियों के मामले पर सुनवाई की।

 

इस महत्वपूर्ण मामले में अवकाशकालीन जज न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की पीठ ने स्पष्ट किया कि चयन का मुख्य आधार मेरिट होना चाहिए और काउंसिलिंग में छूट गए अभ्यर्थियों केलिए विषय, जिला व आरक्षण से संबंधित सीट रिक्त रखी जाए क्योंकि शिक्षा विभाग ने कम समय के भीतर काउंसलिंग कराने का निर्णय लिया है, जिसकी वजह से उच्च मेरिट पर आने वाले अभ्यर्थी कार्यसिलिंग में शामिल नहीं हो सके।

 

अब विभाग मेरिट लिस्ट जारी नहीं कर रहा है। इस आदेश के बाद अब उन अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है जो अधिक अंक होने के बावजूद केवल प्रशासनिक अव्यवस्था और समय की कमी के कारण काउंसलिंग में शामिल नहीं हो पाए थे। कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़े निर्देश दिए हैं कि प्रभावित अभ्यर्थियों के हक की रक्षा की जाए उनकेलिए पदरिक्त रखे जाएं।

 

मामले के अनुसार बीती 12 जनवरी को काउंसलिंग प्रक्रिया विभिन्न जिलों में एक ही दिन रख दी गई और इसकी सूचना भी महज 24 घंटे पहले दी गई। इस कम समय के कारण अभ्यर्थी अपने पसंदीदा जिलों में नहीं पहुंच सके। स्थिति तब और जटिल हो गई जब काउंसलिंग करा रहे अभ्यर्थियों के मूल दस्तावेज शाम 4 बजे तक जमा रखे गए।

 

जिससे उनके पास दूसरे जिले में जाने का कोई विकल्प नहीं बचा। कोर्ट में दाखिल याचिका में बताया गया कि भर्ती प्रक्रिया में स्थापित नियमों का पालन नहीं किया गया और अपने चहेतों की कार्यसिलिंग करा दी गयी। नियमानुसार काउंसलिंग से पहले फाइनल मेरिटलिस्ट और पात्रता सूची सार्वजनिक की जानी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बजाय विभाग ने प्रारंभिक सूची के आधार पर ही सभी आवेदकों को बुला लिया जिससे भारी अव्यवस्था फैली और मेधावी छात्र मेरिट में ऊपर होने के वाबजूद चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए।

 

अभ्यर्थियों का मुख्य तर्क यह है कि उनसे कम अंक बाले लोगों को नियुक्त किया जा रहा है जो सीधे तौर पर मेरिट प्रणाली का उल्लंघन है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि सिर्फ समय की वाध्यता और सूचना के अभाव में उन्हें उनके संवैधानिक हक से बंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इस दलील को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन से इस पूरी प्रक्रिया पर जवाब तलब किया है।

 

अदालत ने अभ्यर्थियों के हित में निर्देश दिया है कि जिन जिलों में याचिकाकर्ताओं ने मेरिट में होने के वाबजूद उपस्थित न हो पाने की विवशता जताई है। वहां उनके लिए सीटे आरक्षित रखी जाएं। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि जब तक मामले का पूर्ण निस्तारण नहीं हो जाता तब तक उन सीटों को भरा न जाए।

 

रणजीत यादव, रमीज हुसैन, शुभम जोशी, ज्योति, कुसुमलता और निशा सहित दर्जनों अभ्यर्थियों ने कोर्ट में अलग अलग याचिकाएं दायर कर अपने हक के लिए कार्यसलिंग के आदेश को चुनौती दी थी।

 

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