अल्मोड़ा: करीब 8 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित बिनसर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में एक बार फिर बाघ की दस्तक से हड़कंप मच गया है। बाघ की मूवमेंट का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसकी वन विभाग ने पुष्टि की है।
वीडियो 6 अगस्त का बताया जा रहा है, जिसे यूपी से आए पर्यटकों ने बिनसर टीआरसी से करीब 200 मीटर पहले कैमरे में कैद किया। बिनसर में बाघ की सक्रियता के बाद वन महकमा अलर्ट हो चुका है।
वन विभाग ने बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए क्षेत्र में कैमरा ट्रैप लगाए हैं। साथ ही क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) को भी सक्रिय किया गया है। विभाग की ओर से आसपास के ग्रामीणों को सतर्क रहने और वन्यजीवों से बचाव के लिए जागरूक किया जा रहा है।
डीएफओ, सिविल सोयम वन प्रभाग प्रदीप धौलाखंडी ने बताया कि बाघ की गतिविधियों की लगातार निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि बाघ सामान्य तौर पर करीब 1000 से 1500 वर्ग किलोमीटर तक के बड़े क्षेत्र में विचरण कर सकते हैं। ऐसे में बाघ का बिनसर क्षेत्र में पहुंचना भी इसी मूवमेंट का हिस्सा हो सकता है।
बिनसर में पहले भी दर्ज हो चुकी है बाघ की मौजूदगी
बिनसर में बाघ की मौजूदगी का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले दिसंबर 2023 और जून 2024 में भी सेंचुरी के अलग-अलग क्षेत्रों में बाघ की मूवमेंट कैद हुई थी। अब एक बार फिर बाघ की सक्रियता सामने आने से आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों में भय का माहौल है। हाल के दिनों में मोहान क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं ने भी ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।
बाघों के पहाड़ों की ओर रुख की वजह ?
जानकारों के अनुसार, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और आसपास के क्षेत्रों में बाघों की बढ़ती संख्या के बीच नए इलाकों में उनका मूवमेंट देखने को मिल रहा है। सीमित क्षेत्र और भोजन की उपलब्धता पर बढ़ते दबाव के कारण बाघ मैदानी क्षेत्रों से आगे पहाड़ी इलाकों की ओर भी बढ़ रहे हैं। यही वजह है कि बिनसर, जागेश्वर और बागेश्वर के सुंदरढूंगा जैसे क्षेत्रों में भी बाघ की मौजूदगी के मामले सामने आ चुके हैं।
वन विभाग की तैयारियों पर उठे सवाल
बिनसर में बाघ की मौजूदगी की पुष्टि के बाद वन विभाग ग्रामीणों को जागरूक करने, गश्त बढ़ाने और क्यूआरटी सक्रिय करने का दावा कर रहा है। हालांकि, स्थानीय ग्रामीण इन व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्थानीय निवासी ईश्वर जोशी का कहना है कि बिनसर सेंचुरी महज 45.59 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली है और सेंचुरी के भीतर भी आबादी वाले क्षेत्र हैं। ऐसे में बाघ की मौजूदगी को गंभीरता से लिया जाना जरूरी है।
ईश्वर जोशी का आरोप है कि बिनसर में पहले भी बाघ की सक्रियता सामने आती रही है, लेकिन वन विभाग इसे गंभीरता से नहीं लेता था। इस बार विभाग ने बाघ की मौजूदगी स्वीकार की है, लेकिन ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर बाघ की मौजूदगी वाले क्षेत्र में कोई अनहोनी होती है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। उन्होंने वन विभाग से ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
वनकर्मियों के पास पर्याप्त संसाधन तक नहीं
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, वन्यजीवों से लोगों की सुरक्षा के लिए वन विभाग के पास स्टाफ और संसाधनों की कमी भी चुनौती बनी हुई है। कई स्थानों पर वनकर्मियों के पास वन्यजीवों से निपटने के लिए जरूरी हथियार और पर्याप्त संसाधन तक नहीं हैं। ऐसे में बाघ की लगातार मौजूदगी के बीच वनकर्मियों और ग्रामीणों की सुरक्षा किस तरह सुनिश्चित होगी, यह भी बड़ा सवाल है।
बिनसर जैसे संवेदनशील और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र में बाघ की लगातार सक्रियता ने वन महकमे की चिंता बढ़ा दी है।
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