अल्मोड़ा: आर्य कन्या इंटर कॉलेज में जिला स्तरीय विज्ञान संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय “भारतीय ऊर्जा बास्केट 2047: संभावनाएं एवं चुनौतियां” रहा। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र-छात्राओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूकता तथा भारत के उज्ज्वल ऊर्जा भविष्य के लिए नवाचार और चिंतन की भावना विकसित करना रहा।
प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर कुमारी गरिमा पपनोई बोनाफाइड पब्लिक स्कूल चौखुटिया, द्वितीय स्थान पर कुमारी गीतांजलि तिवारी राजकीय इंटर कॉलेज खूट तृतीय स्थान पर आयुष्मान थापा विजडम कॉन्वेंट हाई स्कूल चौखुटिया रहे।
जनपद स्तर पर प्रथम व द्वितीय स्थान प्राप्त प्रतिभागी राज्य स्तर पर प्रतिभाग करेंगे। जनपद स्तर पर प्रत्येक विकासखंड से प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त प्रतिभागियों द्वारा प्रतिभाग किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्य शिक्षा अधिकारी हरक राम कोहली रहे। कार्यक्रम की संयोजक एवं मेजबान विद्यालय की प्रधानाचार्य दीप्ति शाह तथा जिला विज्ञान समन्वयक विनोद कुमार राठौर के निर्देशन में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में प्रतिभागी छात्र-छात्राओं ने भारतीय ऊर्जा क्षेत्र की संभावनाओं, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा संरक्षण, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा तथा ऊर्जा आत्मनिर्भरता से जुड़ी चुनौतियों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
सीईओ कोहली ने अपने संबोधन में कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की प्राप्ति में ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका है। देश के ऊर्जा भविष्य को सुरक्षित और सुदृढ़ बनाने के लिए वैज्ञानिक सोच, नवीन तकनीकों का विकास तथा ऊर्जा के विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना आवश्यक है।
उन्होंने छात्र-छात्राओं से विज्ञान को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखते हुए दैनिक जीवन की समस्याओं के समाधान से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी के नवाचार और रचनात्मक विचार भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
जिला समन्वयक राठौर ने संगोष्ठी के विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में ऊर्जा की उपलब्धता, गुणवत्ता, वहनीयता और सतत उपयोग की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जलविद्युत तथा अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को अपनाने के साथ-साथ ऊर्जा संरक्षण के प्रति जनभागीदारी को बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर अपने विचार रखने और भविष्य की ऊर्जा चुनौतियों के समाधान के लिए रचनात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का आह्वान किया।
संगोष्ठी में प्रतिभागियों के प्रस्तुतिकरण, विषय-वस्तु, वैज्ञानिक तथ्यों, अभिव्यक्ति तथा तार्किक विश्लेषण के आधार पर मूल्यांकन किया गया। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में डॉ. प्रभाकर जोशी, पंकज जोशी एवं डॉ. दीप जोशी शामिल रहे। निर्णायकों ने विद्यार्थियों के विचारों का मूल्यांकन करते हुए विषय की वैज्ञानिक समझ, प्रस्तुतीकरण शैली तथा ऊर्जा संबंधी मुद्दों पर उनकी जानकारी का परीक्षण किया।
India Bharat News Latest Online Breaking News