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सरकारी जमीन की बिक्री, नीलामी और दीर्घकालीन लीज पर रोक लगाए सरकार, उपपा ने राज्यपाल व मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

-UIIDB तत्काल भंग कर सरकारी भूमि पर श्वेतपत्र जारी करने की मांग

 

अल्मोड़ा: उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने प्रदेश में सरकारी भूमि की बिक्री, नीलामी और दीर्घकालीन लीज की प्रक्रियाओं पर तत्काल रोक लगाने तथा उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (UIIDB) को तत्काल भंग करने की मांग की है। इस संबंध में पार्टी ने वरिष्ट नेता एवं संस्थापक अध्यक्ष पीसी तिवारी के नेतृत्व में अपर जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया।

 

पार्टी ने कहा कि निवेश और रोजगार के नाम पर सरकारी विभागों की भूमि को निजी एवं व्यावसायिक परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराने की प्रक्रिया गंभीर चिंता का विषय है। उपलब्ध सूचनाओं के अनुसार होटल, रिसॉर्ट, स्पा एवं वेलनेस सेंटर, आवासीय कॉलोनियों तथा अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए सरकारी भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रियाएं आगे बढ़ रही हैं। करीब 7,000 बीघा सरकारी भूमि से जुड़े प्रस्तावों को लेकर भी सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

 

उपपा ने सरकार से मांग की कि सरकार अब तक सरकारी भूमि के आवंटन, बिक्री, नीलामी और लीज से संबंधित पूरी जानकारी सार्वजनिक करे और इस पर एक श्वेतपत्र जारी करे। इसमें यह स्पष्ट किया जाए कि किस विभाग की कितनी भूमि, किस व्यक्ति अथवा संस्था को, किस उद्देश्य से और किन शर्तों पर दी गई है। साथ ही पूर्व में किए गए आवंटनों और लीज की पारदर्शी एवं उच्चस्तरीय समीक्षा की जाए।

 

पार्टी ने कहा कि यदि निवेश के नाम पर सरकारी भूमि उपलब्ध कराई जाती है तो उसमें स्थानीय युवाओं, स्थानीय उद्यमियों, महिला समूहों, सहकारी संस्थाओं तथा छोटे और मध्यम कारोबारियों को प्राथमिकता देने की स्पष्ट नीति होनी चाहिए। किसी भी बड़े व्यावसायिक प्रोजेक्ट से पहले स्थानीय समुदाय और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी तथा व्यापक जनहित का परीक्षण भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

 

पार्टी ने कहा कि नानीसार जैसे संघर्षों ने उत्तराखंड में जल, जंगल और जमीन के सवाल को हमेशा केंद्र में रखा है। राज्य गठन की मूल भावना भी यही थी कि उत्तराखंड के प्राकृतिक और भूमि संसाधनों का उपयोग यहां के लोगों के व्यापक हित में हो। सरकारी भूमि जनता की संपत्ति है और इसके उपयोग में पारदर्शिता, जनभागीदारी तथा स्थानीय हित सर्वोच्च होने चाहिए।

 

पार्टी ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड को केवल निवेश के लिए उपलब्ध भूमि के रूप में नहीं देखा जा सकता। सरकार को ऐसी विकास नीति बनानी चाहिए जिसमें रोजगार और निवेश के साथ-साथ स्थानीय समाज, स्थानीय उद्यमिता और आने वाली पीढ़ियों के हित सुरक्षित रहें।

 

पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी सामाजिक, राजनीतिक एवं जन संगठनों को साथ लेकर नानीसार बचाओ, उत्तराखंड बचाओ की भावना को आगे बढ़ाते हुए प्रदेशव्यापी जनआंदोलन शुरू करेगी।

 

ज्ञापन देने वालों में पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष नारायण राम, केंद्रीय सचिव किरन आर्य, एड. गोपाल राम, मनोज पंत, मोहम्मद साकिब, वंदना कोहली, हीरा देवी, पूजा आर्या, पार्वती थापा, त्रिभुवन शर्मा, रोहित बिष्ट, तौसीफ खान, सिमरन आदि मौजूद रहे।

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