अल्मोड़ा: राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन (NMHS) के पुनर्गठन और परियोजना कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर उठे विवाद के बीच गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान (GBPNIHE) की ओर से बयान जारी किया गया है। संस्थान ने परियोजना कर्मचारियों की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि NMHS के प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) का पुनर्गठन संशोधित NMHS Guidelines, 2025 के अनुरूप किया गया है और भर्ती प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत पूरी की गई है।
संस्थान ने अपने बयान में कहा कि GBPNIHE भारतीय हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास, वैज्ञानिक अनुसंधान, जैव विविधता संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और स्थानीय आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में काम कर रहा है।
परियोजना कर्मचारियों ने आरोप लगाया था कि ऑनलाइन साक्षात्कार की प्रक्रिया के दौरान सभी कर्मचारियों को बिना कारण नोटिस देकर बाहर कर दिया गया। संस्थान ने इस आरोप को तथ्यात्मक रूप से सही नहीं बताया।
संस्थान के अनुसार NMHS-PMU का पुनर्गठन संशोधित NMHS Guidelines, 2025 के तहत किया गया है। इसी क्रम में संबंधित परियोजना कार्मिकों को 20 जुलाई 2026 को पत्र जारी किया गया था। संस्थान का कहना है कि इसलिए यह कहना सही नहीं है कि कर्मचारियों को बिना किसी कारण या पूर्व सूचना के सेवा से बाहर किया गया।
बयान में कहा गया है कि संबंधित कार्यवाही NMHS-PMU के पुनर्गठन और संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुरूप नई भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा थी।
साक्षात्कार ऑनलाइन नहीं, ऑफलाइन हुए
कर्मचारियों की ओर से ऑनलाइन इंटरव्यू लिए जाने का आरोप भी लगाया गया था। इस पर संस्थान ने स्पष्ट किया कि साक्षात्कार ऑफलाइन माध्यम से GBPNIHE, अल्मोड़ा में आयोजित किए गए थे। संस्थान के मुताबिक मंत्रालय से जुड़े कुछ विशेषज्ञ और अधिकारी ऑनलाइन माध्यम से साक्षात्कार प्रक्रिया में शामिल हुए थे। इसलिए पूरी चयन प्रक्रिया को ऑनलाइन इंटरव्यू के तौर पर प्रस्तुत करना सही नहीं है।
परियोजना कर्मचारियों द्वारा हाल में घोषित परिणामों में कई अनुभवहीन और अयोग्य अभ्यर्थियों के चयन आरोप को खारिज करते हुए कहा कि चयन प्रक्रिया निर्धारित पात्रता और अनुभव मानदंडों के अनुसार संचालित की गई। अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता, प्रासंगिक अनुभव, पद के अनुरूप उपयुक्तता, साक्षात्कार में प्रदर्शन और पद की आवश्यकताओं को समग्र रूप से ध्यान में रखा गया। संस्थान ने कहा कि चयन केवल पूर्व अनुभव के आधार पर नहीं किया गया है।
भर्ती में DoPT के नियमों का पालन नहीं किए जाने के आरोप पर संस्थान ने कहा कि NMHS-PMU का पुनर्गठन संशोधित NMHS Guidelines, 2025 के अनुरूप किया गया है, जिन्हें सक्षम स्तर पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव द्वारा अनुमोदित किया गया है।
संस्थान ने स्पष्ट किया कि NMHS-PMU में संबंधित पद परियोजना आधारित Consultant के पद हैं और इनकी नियुक्ति नियमित केंद्रीय सरकारी पदों एवं सेवाओं में भर्ती के समान प्रकृति की नहीं है। बयान के अनुसार DoPT के आरक्षण संबंधी निर्देश मुख्य रूप से केंद्र सरकार के पदों एवं सेवाओं में नियुक्ति से संबंधित हैं। Consultant पदों पर नियुक्ति में संस्था द्वारा लागू स्वीकृत व्यवस्था, पद की प्रकृति, कार्य की आवश्यकताओं और निर्धारित पात्रता एवं अनुभव मानदंडों को ध्यान में रखा जाता है।
गैर-हिमालयी राज्यों से अनुभवहीन लोगों की नियुक्ति के आरोप पर संस्थान ने कहा कि चयनित अभ्यर्थियों में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी हिमालयी राज्यों से ही संबंधित हैं।
संस्थान का कहना है कि इसलिए यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है कि NMHS-PMU के संचालन के लिए गैर-हिमालयी राज्यों के अनुभवहीन लोगों को प्राथमिकता दी गई। बयान में कहा गया है कि हिमालयी क्षेत्र का अनुभव महत्वपूर्ण होने के साथ संबंधित पद की विशिष्ट जिम्मेदारियों और आवश्यक विशेषज्ञता को भी चयन प्रक्रिया में ध्यान में रखा गया।
संस्थान के अधिकारियों पर लापरवाही और किसी विशेष व्यक्ति या समूह को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से भर्ती प्रक्रिया संचालित करने के आरोप को संस्थान ने खारिज करते हुए कहा कि भर्ती और पुनर्गठन से संबंधित निर्णय स्वीकृत NMHS Guidelines, 2025 और निर्धारित संस्थागत प्रक्रिया के अनुरूप लिए गए हैं। चयन में निर्धारित पात्रता, प्रासंगिक अनुभव और साक्षात्कार के दौरान अभ्यर्थियों के प्रदर्शन को ध्यान में रखा गया।
संस्थान ने इस पर कहा कि वर्तमान और पुनर्गठित PMU में पदों की प्रकृति, जिम्मेदारियों, योग्यता, अनुभव और स्वीकृत मानव संसाधन व्यवस्था में अंतर होने के कारण मानदेय के प्रावधान अलग हो सकते हैं। इसलिए पुराने परियोजना कर्मचारियों और पुनर्गठित PMU के कर्मचारियों के मानदेय की सीधे तुलना करना उचित नहीं है।
संस्थान ने कहा कि नए परियोजना स्टाफ का मानदेय संबंधित पदों और स्वीकृत व्यवस्था के अनुसार निर्धारित किया गया है और किसी व्यक्ति विशेष के लिए अलग से मानदेय निर्धारित किए जाने का प्रश्न नहीं है।
परियोजना कर्मचारियों की ओर से लगाए गए आरोपों पर संस्थान ने कहा कि इससे संस्थान की छवि और प्रतिष्ठा को प्रभावित करने का प्रयास परिलक्षित होता है। संस्थान पिछले 35 वर्षों से हिमालय और यहां के लोगों के विकास के लिए निष्ठा एवं पारदर्शिता के साथ कार्य कर रहा है। उसकी प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता सार्वजनिक हित से जुड़ी हुई है।
संस्थान ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों और लागू नियमों के आलोक में पूरे प्रकरण की समीक्षा की जाएगी। साथ ही आवश्यकतानुसार संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध प्रचलित विधिक और संस्थागत प्रावधानों के तहत उचित कार्रवाई किए जाने पर विचार किया जाएगा।
गौरतलब है कि इससे पहले संस्थान से हटाए गए परियोजना कर्मचारियों ने प्रेस वार्ता कर भर्ती और पुनर्गठन प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की थी। अब संस्थान की ओर से जारी बयान में इन आरोपों को खारिज करते हुए भर्ती प्रक्रिया को निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप बताया गया है।
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