Breaking News

गर्व: गीतांजलि श्री के उपन्यास को हिंदी का पहला ‘अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार’

डेस्क। हिंदी की मशहूर लेखिका गीतांजलि श्री (Writer Geetanjali Shree) के उपन्यास ‘टूंब ऑफ़ सैंड’ को अंतरराष्ट्रीय बुकर प्राइज़ से नवाज़ा गया है। ‘टूंब ऑफ़ सैंड’, गीतांजलि श्री के मूल हिंदी उपन्यास ‘रेत-समाधि’ का अनुवाद है। इसका अंग्रेज़ी अनुवाद मशहूर अनुवादक डेज़ी रॉकवेल ने किया है। बीते दिन लंदन में हुए एक समारोह में उन्हें यह पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

मूल रूप से मैनपुरी, उत्तरप्रदेश निवासी लेखिका गीतांजलि श्री ने अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार -2022 जीत देश को गौरवान्वित करने के साथ ही इतिहास रचा है। गीतांजलि श्री फिलहाल दिल्ली में रहती है।

‘रेत समाधि’ अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीतने वाला किसी भी भारतीय भाषा का पहला उपन्यास बन गया है। यह विश्व की उन 13 पुस्तकों में शामिल था, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार के लिए लिस्ट में शामिल किया गया था।

गीतांजलि श्री कई लघुकथाओं और उपन्यासों की लेखिका हैं। उनके 2000 के उपन्यास ‘माई’ को 2001 में क्रॉसवर्ड बुक अवार्ड के लिए चुना गया था। उन्होंने 50,000 पौंड का अपना पुरस्कार लिया और पुस्तक के अंग्रेजी अनुवादक, डेजी रॉकवेल के साथ इसे साझा किया।

इंटरनेशनल बुकर प्राइज़ हर वर्ष अंग्रेज़ी में अनुवादित और इंग्लैंड/आयरलैंड में छपी किसी एक अंतरराष्ट्रीय भाषा की किताब को दिया जाता है। इस पुरस्कार की शुरूआत वर्ष 2005 में हुई थी।

बुकर सम्मान मिलने के बाद अपनी थैंक्यू स्पीच में गीतांजलि श्री ने कहा, “मैंने कभी बुकर प्राइज़ जीतने की कल्पना नहीं की थी. कभी सोचा ही नहीं कि मैं ये कर सकती हूँ. ये एक बड़ा पुरस्कार है. मैं हैरान हूं, प्रसन्न हूं, सम्मानित महसूस कर रही हूं और बहुत कृतज्ञ महसूस कर रही हूं।”

Check Also

काम की खबर: PAN कार्ड से आधार लिंक करने की अंतिम तिथि बढ़ी… ये है नई डेडलाइन

🔊 इस खबर को सुने जानिए कैसे करें अपने आधार को पैन कार्ड से लिंक …