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वरिष्ठ कुमाउनी साहित्यकार जुगल किशोर पेटशाली का निधन

अल्मोड़ा। कुमाउनी के प्रसिद्ध रंगकर्मी, लोक साहित्यकार, राजनीतिज्ञ, शिक्षाविद जुगल किशोर पेटशाली का निधन हो गया है। स्व. पेटशाली ने ताउम्र कुमाऊनी भाषा के संरक्षण, हिंदी साहित्य लेखन, कुमाउनी परंपरागत वाद्य यंत्रों को सजोने में अविस्मरणीय योगदान दिया।

 

उनके कुमाउनी साहित्य, लोक कला और संस्कृति के क्षेत्र में दिये गये योगदान को देखते हुए राज्य सरकार ने देहरादून में एक मॉडर्न लाइब्रेरी संग्रहालय की स्थापना कीं। जो विशेषकर कुमाऊनी वाद्य यंत्रों, कुमाउनी साहित्य, लोक संस्कृति, स्थानीय पांडुलिपि के प्रमुख केंद्र रूप में अपनी पहचान बना चुका है।

 

कुमाउनी भाषा को समर्पित असाधारण योगदान के कारण उन्हें “कुमाउनी भाषा का इनसाइक्लोपीडिया” भी कहा जाता था। स्व. पेटशाली को कई प्रतिष्ठित साहित्यिक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था।

 

79 वर्षीय स्वर्गीय पेटशाली ने कल देर रात्रि चितई स्थित अपने पैतृक आवास में अंतिम सांस ली। परिजनों ने बताया की स्वर्गीय पेटशाली पिछले काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे। वह अपने पीछे धर्मपत्नी पुष्पा पेटशाली, सुनील पेटशाली बड़े पुत्र, गिरीश चंद्र, भुवन चंद्र, शेखर चंद्र, हिमांशु पेटशाली, सबसे छोटे बेटे मुकुल पेटशाली समेत नाती पोतों से भरा पूरा परिवार छोड़ गये हैं।

 

उनकी अंतिम संस्कार यात्रा 10.30 बजे पैतृक आवास से दलबैंड घाट तक निकाली जाएगी। उनके निधन पर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों, साहित्यकारों, रंगकर्मियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है।

 

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