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प्रो. सेन की सोच के आधार पर पर्वतीय कृषि को मिली अलग पहचान: डॉ. कांत

वीपीकेएएस के संस्थापक प्रो. बोशी सेन की जयंती उत्साह के साथ मनाई

 

अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, हवालबाग के संस्थापक पद्मभूषण प्रो. बोशी सेन की जयंती संस्थान में उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ स्‍वामी विवेकानन्‍द, प्रो. बोशी सेन एवं गर्ट्यूड इमरसन सेन की प्रतिमाओं पर माल्‍यार्पण कर किया गया। इस अवसर पर वैज्ञानिकों, कर्मचारियों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से भाग लिया।

कार्यक्रम में प्रो. सेन के जीवन, उनके बहुआयामी योगदान एवं पर्वतीय कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में उनके कार्यों पर चर्चा की गई। संस्‍थान के निदेशक डॉ. लक्ष्‍मी कान्‍त ने कहा कि प्रो. बोशी ने इस संस्‍थान को स्‍थापित कर पर्वतीय कृषि की समस्याओं और संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए अनुसंधान को एक नई दिशा दी। उनकी इसी सोच के आधार पर आज पर्वतीय कृषि को एक अलग पहचान मिली है। वें सदैव इस बात के पक्षधर थे कि अनुसंधान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहे, बल्कि किसानों तक पहुँचे और उनके जीवन स्तर में सुधार लाए।

 

संस्‍थान के नवनिर्मित भवन में स्थित सभागार का नाम प्रो. बोशी सेन सभागार एवं समिति कक्ष का नाम गर्ट्यूड इमरसन सेन समिति कक्ष रखने का निर्णय सर्वसहमति से लिया। विभागाध्‍यक्ष, फसल सुधार डॉ. निर्मल कुमार हेडाउ, डॉ. बृज मोहन पाण्‍डेय ने अपने विचार रखें। संचालन मुख्‍य तकनीकी अधिकारी ने रेनू सनवाल ने किया।

 

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