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विमलकोट शक्तिपीठ में नव वर्ष पर उमड़ा आस्था का सैलाब, लोक गायकों के सुरों पर थिरके भक्त

 

अल्मोड़ा। धौलछीना स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ विमलकोट भगवती मंदिर में नव वर्ष पर भव्य मेले का आयोजन किया गया। साल के पहले दिन माँ भगवती के दर्शन और आशीर्वाद लेने के लिए मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह नौ बजे से लेकर शाम पांच बजे तक दर्शनार्थियों की लंबी कतारें लगी रहीं। पूरा इलाका जय माता दी के जयकारों से गूंज उठा।

 

विधायक मनोज तिवारी ने सपरिवार मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। तथा मेले का शुभारंभ किया। उन्होंने माँ भगवती से क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की और वहां मौजूद सभी श्रद्धालुओं को नव वर्ष की शुभकामनाएं दीं।

 

मेले का मुख्य आकर्षण कुमाऊंनी लोक संस्कृति से सराबोर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम रहे। प्रसिद्ध लोक गायक चंद्र प्रकाश, राकेश पनेरू, बलवीर राणा, प्रियंका चम्याल, रोशन बनोला और धीरज पांडे के भजनों और गीतों में वहां मौजूद दर्शक झूमने पर मजबूर हो गए। लोक गीतों की धुन पर महिलाओं ने पारंपरिक ‘झोड़ा-चांचरी’ लगाकर अपनी संस्कृति की झलक पेश की। देर शाम तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दौर चलता रहा, जिसका दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया।

 

मेले में उमड़ी भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर कमेटी और प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए थे। कमेटी द्वारा लगभग 3,000 लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई थी और सुबह आठ बजे से ही मंदिर के कपाट दर्शन के लिए खोल दिए गए थे। सुरक्षा के लिहाज से पर्याप्त संख्या में पुलिस बल और महिला पुलिसकर्मी तैनात रहे, जिससे मेला शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। पुलिस को बार-बार जाम की स्थिति से निपटना पड़ा। थाना इंचार्ज सुनील बिष्ट के नेतृत्व में मेला शांतिपूर्ण संपन्न हुआ। व्यवसाई हिमांशु चौहान की ओर से भव्य भंडारे का आयोजन किया गया। हजारों लोगों ने भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया।

 

मंदिर कमेटी के प्रबंधक दरवान सिंह रावत ने बताया यह मेला क्षेत्र के लोगों के लिए न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह एक बड़ा सांस्कृतिक मिलन समारोह भी बन चुका है। युवा पीढ़ी को धार्मिक आस्थाओं के माध्यम से नव वर्ष की शुभारंभ करने तथा बीते वर्ष पर बुराई त्यागने के रूप में लिया जाता है ताकि लोग थर्टी फर्स्ट को मांस मदिरा से दूर रहकर अपने देवी देवताओं तथा सनातन संस्कृति से वर्ष का शुभारंभ करें। इस मकसद से इस मेले का आयोजन किया जा रहा है। भविष्य में यह मंदिर एक धाम के रूप में विकसित होगा। तथा क्षेत्र की एक नई पहचान रूप में जाना जाएगा।

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