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Almora: कहीं जर्जर भवन में पढ़ाई तो कहीं नौनिहालों को पानी तक नसीब नहीं, शिक्षा विभाग के अधिकारियों से मिला प्रतिनिधिमंडल, उठाई यह मांग

 

अल्मोड़ा: सरकारी स्कूलों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। ​सरकार व शिक्षा मंत्री के तमाम दावों के बीच आज भी अधिकांश विद्यालय ऐसे हैं, जहां नौनिहालों के लिए मूलभूत व्यवस्थाएं नहीं है। जीर्ण-क्षीर्ण भवनों के निर्माण, पेयजल जैसी आवश्कताओं के लिए ग्रामीणों को बार-बार अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ रहे है।

 

बुधवार को जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल द्वारा मुख्य शिक्षा अधिकारी और प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी से मुलाकात की गई। प्रतिनिधिमंडल द्वारा अधिकारियों को अवगत कराया गया कि, नगर से लगे राजकीय इंटर कॉलेज, लोधिया का मुख्य भवन काफी जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। परिसर में स्थित अन्य कई भवन भी जीर्ण क्षीर्ण हो चुके है। बारिश के दौरान यहां कई कक्षा कक्षों की छत टपकने लगती है। खतरे के साए में रहकर छात्र छात्राएं पढ़ाई करने और शिक्षक पढ़ाने को मजबूर हैं।

 

पिछले डेढ़ साल में कई बार ​स्थानीय जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों व ग्रामीणों द्वारा इस बारे में अधिकारियों को लिखित व मौखिक रूप से अवगत कराया जा चुका है। विभाग, प्रशासन और शासन को ज्ञापन भी प्रेषित किए गए है। लेकिन बदले में उन्हें सिर्फ कोरे आश्वासन मिल रहे हैं। कार्यवाही फाइलों तक सीमित है। ऐसे में अब जनप्रतिनिधियों और अभिभावकों में आक्रोश पनपने लगा है।

 

यही हाल राइंका लोधिया के ठीक बगल में स्थित सरकारी प्राइमरी स्कूल का है। जहां नौनिहालों को पीने का पानी त​क नसीब नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा प्राथमिक विद्यालय स्याली, तलाड़ और नवीन दरखास में भी मासूम बच्चे पेयजल से वंचित है। ग्रामीणों ने कहा कि सरकारी विद्यालयों से अभिभावकों का मोहभंग होने की वजह वहां पर्याप्त संसाधन न होना है। लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक न होने के चलते वह अपने पाल्यों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने को मजबूर हैं।

 

प्रतिनिधिमंडल ने समस्याओं के समाधान के लिए उचित कार्यवाही करने की मांग की है। मांग पूरी न होने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी है। प्रतिनिधिमंडल में जिला पंचायत सदस्य प्रेम सिंह लटवाल, जिपं सदस्य प्रतिनिधि आनंद सिंह कनवाल, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य हितेश नेगी, भगवान रावल, कृष्ण बहादुर, अरविंद आदि मौजूद रहे।

 

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