अल्मोड़ा: वन चेतना केंद्र, एनटीडी में हंस फाउंडेशन एवं संबंधित विभागों के संयुक्त तत्वावधान में फायर फाइटरों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में वनाग्नि की रोकथाम, आग पर प्रारंभिक नियंत्रण, सुरक्षित बचाव कार्य, अग्निशमन उपकरणों के उपयोग तथा आपात स्थिति में प्राथमिक उपचार की जानकारी दी गई।
हंस फाउंडेशन के सीनियर प्रोजेक्ट मैनेजर पुरुषोत्तम थपलियाल ने बताया कि वन अग्निशमन एवं रोकथाम परियोजना उत्तराखंड एवं हिमाचल प्रदेश में संचालित की जा रही है। उन्होंने कहा कि ग्राम स्तर पर चयनित फायर फाइटरों की वनाग्नि की रोकथाम एवं नियंत्रण में अहम भूमिका है। गांव में आग लगने की सूचना मिलते ही फायर फाइटर वन विभाग को तत्काल सूचित करते हैं तथा प्रारंभिक स्तर की आग को उपलब्ध संसाधनों और सुरक्षा उपकरणों के साथ नियंत्रित करने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने कहा कि आग के विकराल रूप लेने पर फायर फाइटरों को स्वयं जोखिम में नहीं पड़ना चाहिए, बल्कि सुरक्षित स्थान पर रहते हुए वन विभाग की टीम के साथ समन्वय करना चाहिए। उन्होंने ग्रामीण स्तर पर जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता को वनाग्नि की रोकथाम का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
प्रभागीय वनाधिकारी सिविल सोयम प्रदीप धौलाखंडी ने कहा कि हंस फाउंडेशन द्वारा वर्ष 2023 से वनाग्नि की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है, जिसके लिए हंस फाउंडेशन की टीम बधाई की पात्र है। उन्होंने कहा कि संस्था द्वारा ग्राम स्तर पर ग्रामीणों को वनाग्नि के प्रति जागरूक किया जा रहा है और आग पर त्वरित नियंत्रण में फायर फाइटरों का महत्वपूर्ण योगदान रहता है।
डीएफओ ने फायर फाइटरों से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में ग्रामीणों को वनाग्नि से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करें। खेतों में आड़ न जलाने, जंगलों में आग फैलाने वाले कारणों से बचने तथा आग लगने पर तत्काल वन विभाग को सूचना देने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाए। उन्होंने पिरूल को जंगलों से हटाकर उपयोगी बनाने के लिए ‘पिरूल लाओ, पैसे पाओ’ योजना की जानकारी देते हुए ग्रामीणों को अधिक से अधिक पिरूल एकत्र करने के लिए प्रेरित किया।
एसडीआरएफ प्रशिक्षक पंकज डंगवाल ने प्रशिक्षण के दौरान वनाग्नि के प्रमुख कारणों, जमीनी आग, सतही आग एवं शिखराग्नि के प्रकार तथा आग पर नियंत्रण के तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने फायर फाइटरों को आग की स्थिति का आकलन, सुरक्षित दूरी बनाए रखने, टीमवर्क एवं संचार व्यवस्था के साथ कार्य करने के बारे में बताया। साथ ही आग बुझाने और बचाव कार्य का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के आलोक कुमार ने वनाग्नि एवं आपदा की स्थिति में बचाव एवं राहत कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने घायल व्यक्ति को सुरक्षित निकालने के तरीके बताते हुए स्थानीय संसाधनों की मदद से इंप्रोवाइज्ड स्ट्रेचर तैयार करने तथा घायल व्यक्ति को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।
अग्निशमन विभाग के मुकेश चतुर्वेदी ने अग्निशमन उपकरणों के सही उपयोग, आग से बचाव तथा सिलेंडर, विद्युत उपकरणों और जंगल में आग लगने की स्थिति में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जानकारी दी।
वन विभाग की पूनम पंत ने फायर फाइटरों को वनाग्नि की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए अपनाए जाने वाले उपायों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया तथा आग की स्थिति में सुरक्षित तरीके से कार्य करने और आवश्यक सावधानियों का अभ्यास कराया।
कार्यक्रम का संचालन हंस फाउंडेशन के सीडीएस रजनीश रावत ने किया। इस दौरान एसडीआरएफ से धीरज बिष्ट, राजेंद्र गिरी, सूरज बिष्ट, अग्निशमन विभाग से धीरेंद्र सिंह एवं बबीता जोशी, द हंस फाउंडेशन की ब्लॉक समन्वयक अनीता कनवाल, कैलाश, दीपक, शंकर, राजेंद्र, ज्योति एवं मनीष सहित कई फायर फाइटर्स मौजूद रहे।
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